Chhattisgarh News: वन मंडल कटघोरा द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगलों में लगने वाली आग को रोकने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को जागरूक करना और उन्हें संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदार बनाना था। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा — “जीव जिवस्य जीवनम्”, यानी प्रकृति में हर जीव एक-दूसरे पर निर्भर है और जंगलों की सुरक्षा से ही सुरक्षित भविष्य संभव है।
Chhattisgarh News: ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कसईपाली, देवरी और ढोंगा गांव के ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों ने पूरे उत्साह के साथ चर्चा और गतिविधियों में भाग लिया, जिससे कार्यक्रम बेहद सफल और प्रभावी रहा। ग्रामीणों को यह समझाया गया कि वन संसाधनों का सही उपयोग कैसे किया जाए और जंगलों को नुकसान से कैसे बचाया जाए।
संरक्षण और आग से बचाव की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही यह भी बताया गया कि जंगलों में आग लगने से पर्यावरण, पशु-पक्षियों और इंसानों को कितना नुकसान होता है। आग लगने के कारणों और उससे बचने के आसान उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया गया, ताकि समय रहते सही कदम उठाए जा सकें।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
मुख्य प्रशिक्षक श्री प्रभात दुबे ने ग्रामीणों को सरल भाषा में जरूरी जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच होने वाले टकराव को कैसे कम किया जा सकता है। साथ ही जंगल में आग लगने पर तुरंत सूचना देना क्यों जरूरी है, इस पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक गांव के लोग आगे नहीं आएंगे, तब तक जंगलों की सही तरह से रक्षा संभव नहीं है। ग्रामीण ही जंगल के असली रक्षक हैं।
जनप्रतिनिधियों का संदेश
कार्यक्रम में जनपद पंचायत कटघोरा के प्रतिनिधि अध्यक्ष श्री गोविंद सिंह कंवर भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जंगल और वन्यजीवों की रक्षा सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की भूमिका अहम है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगलों को अपनी संपत्ति समझें और उनकी सुरक्षा में सहयोग करें।
वन विभाग की भूमिका
इस मौके पर डीएफओ कटघोरा निशांत कुमार ने बताया कि वन्यजीव पर्यावरण संतुलन और मानव जीवन के लिए बहुत जरूरी हैं। गर्मी के मौसम में जब जंगलों में पानी और भोजन की कमी होती है, तब जानवर बाहर की ओर आ सकते हैं। ऐसे समय में घबराने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए और तुरंत वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
जागरूकता की दिशा में बड़ा कदम
वन मंडल कटघोरा की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। इससे ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ी है और सामुदायिक सहयोग को भी मजबूती मिली है। ऐसे कार्यक्रम भविष्य में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे।
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