Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई ) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने से इंकार करने वाले निजी विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें उनकी मान्यता रद्द करना भी शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सभी वर्गों के बच्चों को समान शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
निजी स्कूलों में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित
राज्य में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी, गैर-अनुदान प्राप्त विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इन सीटों पर बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर ही प्रवेश दिलाया जाता है, जिससे शिक्षा की पहुंच आसान हो सके।
सरकार द्वारा निजी विद्यालयों को इस व्यवस्था के तहत प्रति छात्र व्यय के आधार पर प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाता है। यह राशि सरकारी स्कूलों में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या संबंधित निजी स्कूल की वास्तविक फीस, दोनों में से जो भी कम हो, उसके अनुसार तय की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है।
छत्तीसगढ़ में प्रतिपूर्ति राशि अन्य कई राज्यों की तुलना में संतुलित और बेहतर मानी जा रही है। यहां कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र 7000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये वार्षिक प्रतिपूर्ति दी जाती है। तुलना में मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में यह राशि इससे कम है, जबकि कुछ राज्यों में अधिक होने के बावजूद छत्तीसगढ़ का मॉडल व्यावहारिक और संतुलित माना जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत 3,63,515 से अधिक छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस सत्र में भी कक्षा पहली की करीब 22 हजार सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है, जिससे हजारों नए बच्चों को लाभ मिलने की संभावना है।
निजी स्कूलों को RTE पालन की चेतावनी
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि आरटीई के प्रावधानों का पालन सभी निजी विद्यालयों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि इन्हीं नियमों के आधार पर उन्हें मान्यता दी गई है। यदि कोई संस्था इन नियमों का उल्लंघन करती है या प्रवेश प्रक्रिया में बाधा डालती है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे आरटीई से संबंधित किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और सभी को समान अवसर मिल सके।
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