Chhattisgarh Security Operation: बस्तर में नक्सल उन्मूलन के बाद अब छिपाए गए घातक विस्फोटकों को खोजकर निष्क्रिय करने का बड़ा अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान की कमान संभाल रहे बस्तर रेंज के आईजीपी सुंदरराज ने स्पष्ट किया है कि अब लक्ष्य केवल नक्सलियों को खदेड़ना नहीं, बल्कि पूरी धरती को सुरक्षित बनाना है, ताकि आम नागरिक निर्भय होकर जीवन जी सकें।
बस्तर में IED तलाश अभियान तेज
छत्तीसगढ़ के बस्तर को नक्सली मुक्त घोषित करने के बाद अब छिपाए गए हथियारों की तलाश तेज हो गई है। बस्तर की पहाड़ियां और घने जंगलों में जमीन के भीतर दबे घातक हथियारों, विशेषकर आईईडी, की खोज के लिए सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। यही वजह है कि सबसे खतरनाक हथियार आईईडी को खोजने और निष्क्रिय करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी बस्तर दौरे के दौरान कहा कि केवल नक्सलवाद से गांवों को मुक्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी जमीन को सुरक्षित बनाना सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गांवों को ओडीएफ बनाया गया, उसी तरह अब बस्तर के हर गांव को आईईडी मुक्त बनाया जाएगा।
नक्सलियों ने बस्तर में जमीन के भीतर दबाए आईईडी
दरअसल, नक्सलियों ने अपने प्रभाव के दौरान बस्तर के गांवों, पहाड़ियों और अंदरूनी जंगलों में जगह-जगह आईईडी और अन्य विस्फोटक जमीन के भीतर दबा दिए थे। जब सुरक्षा बल सर्चिंग के लिए निकलते थे, तो कई बार उनके कदम पड़ते ही विस्फोट हो जाता था। नक्सलियों के निशाने पर सुरक्षा बलों के जवान होते थे, जिसके कारण कई बार आईईडी ब्लास्ट में जवानों को शहादत देनी पड़ी।
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि बस्तर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में आईईडी और अन्य विस्फोटक छिपाए गए हैं। इन जानकारियों के आधार पर अब राज्य सरकार ने व्यापक अभियान शुरू किया है।
बस्तर में आम लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता
नक्सल मुक्त होने के बाद अब आम लोगों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। बस्तर के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले ग्रामीण और वनवासी अक्सर जंगलों में वन उपज संग्रहण के लिए जाते हैं, जहां वे कई बार अनजाने में विस्फोट का शिकार हो जाते थे। इस गंभीर खतरे को देखते हुए सरकार ने इसे प्राथमिकता में लिया है।
आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों द्वारा किए गए खुलासों के बाद अब अभियान को और तेज कर दिया गया है। इस अभियान में पूर्व नक्सली भी मार्गदर्शन देकर सुरक्षा बलों की मदद कर सकते हैं, जिससे छिपे विस्फोटकों को जल्द से जल्द खोजकर निष्क्रिय किया जा सके।
रिपोर्ट- आशीष शर्मा
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