‘बेटी बोझ नहीं, सम्मान है’, तलाक के बाद बेटी का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत, जज पिता ने बदला समाज का नजरिया; देखें Video

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Meerut Divorce Celebration: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में एक परिवार की अनोखी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी के तलाक के बाद घर वापसी को एक नयी सोच के साथ पेश किया है। उन्होंने तलाक के बाद बेटी का भव्य स्वागत किया। सभी ने बेटी की तस्वीर वाली टी-शर्ट्स पहनी हैं, जिसपर लिखा है ‘I Love My Daughter’, ढोल नगाड़े बज रहे हैं और बेटी को फूलमाला पहनाकर मिठाई खिलाई जा रही है। तलाक के बाद बेटी का ये भव्य स्वागत हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ…

Meerut Divorce Celebration: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में एक परिवार की अनोखी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी के तलाक के बाद घर वापसी को एक नयी सोच के साथ पेश किया है। उन्होंने तलाक के बाद बेटी का भव्य स्वागत किया। सभी ने बेटी की तस्वीर वाली टी-शर्ट्स पहनी हैं, जिसपर लिखा है ‘I Love My Daughter’, ढोल नगाड़े बज रहे हैं और बेटी को फूलमाला पहनाकर मिठाई खिलाई जा रही है। तलाक के बाद बेटी का ये भव्य स्वागत हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।

Meerut Divorce Celebration: तलाक के बाद बेटी का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत

दरअसल, रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की बेटी प्रणिता वशिष्ठ जब क़ानूनी प्रक्रिया के बाद घर लौटी, तो उनका ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान परिवार के सभी लोगों ने ‘आई लव डॉटर’ के नाम से टीशर्ट पहन रखी थी। परिवार और आसपास के लोगों ने भी इस मौके पर उनका उत्साह बढ़ाया। इस पहल का उद्देश्य यह संदेश देना था कि बेटी का आत्मसम्मान सबसे महत्वपूर्ण है।

‘बेटी कभी बोझ नहीं होती’

पति से तलाक के बाद प्रणिता वशिष्ठ ने कहा कि यह उनके जीवन की नई शुरुआत है और उन्होंने अपने सम्मान के लिए यह फैसला लिया। उनकी मां ने कहा कि बेटी कभी बोझ नहीं होती और मायका हमेशा उसका अपना घर होता है।

Retired Judge Welcome Daughter: बेटी को सिर झुकाकर नहीं, सम्मान के साथ घर वापस लाए

रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने साफ़ कहा कि वह अपनी बेटी को सिर झुकाकर नहीं, बल्कि सम्मान के साथ घर वापस लाए हैं। उनका मानना है कि समाज को बेटियों के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए और उन्हें हर हाल में समर्थन देना चाहिए। इस मौके पर परिवार की एक चचेरी बहन, जो यूके से आई थीं, वो भी मौजूद रहीं। उन्होंने इस पहल को प्रेरणादायक बताया है। यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि तलाक अंत नहीं, बल्कि सम्मान के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत हो सकता है।

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Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।