Court orders on Twisha Sharma Case: भोपाल की एक कोर्ट ने 20 मई को 33 वर्षीय त्विषा शर्मा के शव को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने यह फैसला ऐसे समय में दिया, जब मृतका के परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग उठाई है। दूसरी ओर पुलिस अब तक की जांच में इस मामले को आत्महत्या मान रही है।
अदालत के आदेश के बाद अब प्रशासन और पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि शव को लंबे समय तक किस तरह सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर दूसरा पोस्टमार्टम किया जा सके।
Court orders on Twisha Sharma Case: दूसरे पोस्टमार्टम की मांग से बढ़ी परेशानी

फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य स्थिति में किसी शव को कुछ दिनों तक मॉर्च्यूरी में सुरक्षित रखा जा सकता है। लेकिन जब मामला कानूनी विवाद और दोबारा पोस्टमार्टम जैसी प्रक्रिया से जुड़ जाता है, तब शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौती बन जाता है। त्विषा शर्मा के परिजन लगातार स्वतंत्र और निष्पक्ष दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। इसी वजह से प्रशासन पर शव को खराब होने से बचाने का दबाव बढ़ गया है।
Twisha Sharma Morther in Law: पति ने हाईकोर्ट में लगाई अग्रिम जमानत याचिका

इस मामले में मृतका के पति समर्थ सिंह फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को जबलपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। इससे पहले भोपाल की निचली अदालत उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। वहीं समर्थ सिंह की मां और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
Twisha Sharma Death Update : शव को सुरक्षित रखने के लिए क्या होती है प्रक्रिया

भोपाल के हमीदिया अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. आशीष जैन के अनुसार शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सामान्य तौर पर “एम्बामिंग” प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में शरीर के अंदर विशेष रसायन डाले जाते हैं, जिससे शव जल्दी खराब नहीं होता। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एम्बामिंग कर दी जाए तो बाद में दोबारा पोस्टमार्टम करना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि त्विषा शर्मा मामले में यह विकल्प आसान नहीं माना जा रहा, क्योंकि परिवार भविष्य में स्वतंत्र पोस्टमार्टम की मांग कर सकता है।
MP News Today: माइनस 80 डिग्री तापमान की जरूरत

डॉ. आशीष जैन के मुताबिक यदि दूसरे पोस्टमार्टम की संभावना बनाए रखनी हो तो शव को बेहद कम तापमान पर रखना जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि सामान्य मॉर्च्यूरी में शव को करीब 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है। इस स्थिति में शव लगभग पांच से सात दिन तक सुरक्षित रह सकता है। लेकिन अगर तापमान माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए तो शव को ज्यादा समय तक संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सुविधा मिलने पर शव को लगभग 13 से 15 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसमें शुरुआती पांच से सात दिनों के अलावा करीब आठ से दस दिन और जोड़े जा सकते हैं।
फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भोपाल या मध्य प्रदेश में ऐसी आधुनिक सुविधा उपलब्ध नहीं दिखाई दे रही है। डॉ. जैन के अनुसार माइनस 80 डिग्री वाले फ्रीजर सामान्यतः मेडिकल कॉलेजों और रिसर्च लै में दवाइयों तथा जैविक नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग किए जाते हैं। लेकिन इन फ्रीजर की बनावट मानव शव को रखने के लिए उपयुक्त नहीं होती। ज्यादातर फ्रीजर खड़े आकार यानी वर्टिकल डिजाइन में बनाए जाते हैं, जबकि शव को रखने के लिए अलग प्रकार की व्यवस्था चाहिए होती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी लैब में इतनी कम तापमान वाली मशीन मौजूद भी हो, तब भी उसका उपयोग मानव शव के संरक्षण के लिए आसानी से नहीं किया जा सकता।
पुलिस ने पूरे प्रदेश में शुरू की तलाश

अदालत के आदेश के बाद अब शव को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भोपाल के कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे को सौंपी गई है। सुनील दुबे ने बताया कि पुलिस ने पूरे मध्य प्रदेश में ऐसे फ्रीजर की तलाश शुरू कर दी है, जहां शव को कम तापमान में सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश मिलने के बाद सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को ईमेल भेजा गया है। उनसे पूछा गया है कि क्या उनके जिले में सरकारी या निजी स्तर पर ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध है, जहां माइनस 80 डिग्री तापमान तक शव को सुरक्षित रखा जा सके। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अब तक किसी भी जिले से सकारात्मक जानकारी नहीं मिली है।
पुलिस के सामने बढ़ी तकनीकी चुनौती
इस पूरे मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या अदालत के आदेश का पालन करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दूसरे पोस्टमार्टम की संभावना को बनाए रखना है तो शव को बहुत कम तापमान पर रखना जरूरी हो सकता है। लेकिन राज्य में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं होने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। पुलिस लगातार अलग-अलग मेडिकल संस्थानों और स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर रही है।
12 मई को मिला था शव
त्विषा शर्मा का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में मिला था। परिवार ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना और हत्या के आरोप लगाए हैं। वहीं पुलिस अब तक की जांच के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला बता रही है। हालांकि परिवार पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
अदालत ने फिलहाल दूसरी पोस्टमार्टम मांग ठुकराई
भोपाल की अदालत ने फिलहाल दूसरे पोस्टमार्टम की मांग को मंजूरी नहीं दी है। हालांकि अदालत ने शव को सुरक्षित रखने के निर्देश जरूर दिए हैं ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जा सके। इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि यदि अदालत आगे चलकर दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति देती है, तो शव को एम्स दिल्ली भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि अदालत के आदेश के बाद शव को किस तकनीकी व्यवस्था के तहत सुरक्षित रखा जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य मॉर्च्यूरी सुविधाएं लंबे समय तक शव को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वहीं राज्य में अत्यधिक कम तापमान वाली विशेष सुविधा उपलब्ध न होने से प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फिलहाल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन लगातार समाधान खोजने में जुटे हुए हैं, ताकि अदालत के आदेश का पालन किया जा सके और भविष्य में कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो।


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