Govt Mandates Clear labels for AI-generated: भारत सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रहे AI से बने कंटेंट को लेकर बड़े और सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है। नए मसौदा नियमों के अनुसार, अब किसी भी एआई-जनरेटेड या एआई से संशोधित कंटेंट को साफ तौर पर चिन्हित करना जरूरी होगा। इसका मतलब है कि फोटो, वीडियो, ऑडियो या किसी भी डिजिटल सामग्री पर स्पष्ट लेबल या मेटाडेटा होना चाहिए, जिससे यूज़र तुरंत समझ सकें कि कंटेंट असली है या AI रूप से बनाया गया है।
Govt Mandates Clear labels for AI-generated: विज़ुअल टैग और मेटाडेटा होंगे ज़रूरी
इन नियमों के तहत केवल “AI” लिख देना काफी नहीं होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे विज़ुअल मार्कर्स लगाने होंगे जो आसानी से दिखाई दें। तस्वीरों में लेबल कम से कम 10% हिस्से को कवर करेगा। वीडियो या ऑडियो में यह लेबल क्लिप के शुरुआती 10% समय तक दिखेगा या सुनाई देगा। इसके अलावा, मेटाडेटा के ज़रिये भी यह जानकारी जुड़ी रहेगी, ताकि टैग हटाया या छिपाया न जा सके।
AI-Generated Content Regulations: 3 घंटे में आपत्तिजनक कंटेंट हटाना होगा
अगर कोई एआई-जनित पोस्ट अवैध, भ्रामक या आपत्तिजनक पाई जाती है और उसे फ्लैग किया जाता है, तो प्लेटफॉर्म को उसे अधिकतम 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। सरकार का मानना है कि देर होने पर गलत जानकारी तेज़ी से फैलती है और नुकसान बढ़ता है।

Govt Mandates Clear labels for AI-generated (Source: social media )
AI Content Rules: ऑटोमेटेड टूल्स की तैनाती जरूरी
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में ये मसौदा संशोधन तैयार किए हैं। इनके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को ऑटोमेटेड सिस्टम और एआई टूल्स का इस्तेमाल करना होगा, जो अवैध, यौन शोषणकारी या भ्रामक एआई कंटेंट को पहले ही पहचान कर रोक सकें, ताकि वह वायरल होने से पहले ही हट जाए।
Government AI Guidelines: अपलोड करते समय यूज़र से पूछताछ
अब प्लेटफॉर्म्स को यूज़र्स से यह पूछना होगा कि जो कंटेंट वे अपलोड कर रहे हैं, वह असली है या एआई से बना हुआ। इसके बाद प्लेटफॉर्म अपने सत्यापन टूल्स के ज़रिये उस दावे की जांच करेंगे। इससे झूठे या गुमराह करने वाले कंटेंट पर रोक लगेगी।

जुर्माने को लेकर नियमित चेतावनी
नए नियमों में यह भी तय किया गया है कि हर तीन महीने में यूज़र्स को इन एआई नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले दंड और जुर्मानों की जानकारी दी जाएगी। इसका मकसद लोगों को नियमों के प्रति जागरूक रखना है।

डीपफेक और चुनावी चिंता
सरकार का यह कदम हाल के हाई-प्रोफाइल डीपफेक मामलों के बाद आया है, जहां नकली वीडियो और ऑडियो से लोगों की छवि और भरोसे को नुकसान पहुंचा। बिहार में होने वाले आगामी चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग ने भी राजनीतिक दलों को एआई से बनी प्रचार सामग्री को स्पष्ट रूप से लेबल करने के निर्देश दिए हैं। सरकार को आशंका है कि फर्जी कंटेंट लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
पहले जहां एआई कंटेंट को लेकर पारदर्शिता स्वैच्छिक थी, अब यह कानूनी जिम्मेदारी बन गई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को इन नियमों का पालन करना ही होगा। सरकार का साफ संदेश है, डिजिटल दुनिया में भरोसा बनाए रखने के लिए एआई कंटेंट की पहचान और नियंत्रण बेहद ज़रूरी है।
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