Hormuz Safe Passage Cost: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 24वां दिन है, हर दिन बीतते दिन के साथ दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट गहराता जा रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से टेंशन चरम पर है। एक विदेशी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने एक ऑयल टैंकर का 20 लाख डॉलर (करीब 18 करोड़ रुपये से ज्यादा) शुल्क वसूलने का फैसला किया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरूजेर्दी ने भी टैक्स की पुष्टि की और टैक्स लगाने के पीछे की वजह भी बताई।
Hormuz Safe Passage Cost: ‘टोल टैक्स लगाना जरूरी…’
रविवार को ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने कथित तौर पर दावा किया गया। उन्होंने कहा कि टैक्स लगाना ईरान का अधिकार और ताकत का प्रदर्शन है। क्योंकि युद्ध की लगत बढ़ गई है, इसलिए टैक्स वसूलना भी जरुरी हो गया है। बेशक होर्मुज स्ट्रेट पूरी दुनिया में तेल-गैस की शिपिंग के लिए महत्वपूर्ण और एकमात्र रास्ता है, लेकिन इस खाड़ी क्षेत्र का सबसे अहम मोड़ 33 किलोमीटर लंबा रास्ता ईरान से जुड़ा है। इसलिए इस रास्ते पर अपना नियंत्रण दिखाने के लिए टोल टैक्स लगाना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह का कदम ईरान की ताकत को दर्शाता है।
Strait of Hormuz Toll Charges: टैंकर गुजरने के लिए 20 लाख डॉलर का चार्ज

ईरान ने कुछ तेल और LPG टैंकरों के लिए होर्मुज स्ट्रेट में गुजरने के लिए IRGC नियंत्रित सुरक्षित रास्ता बनाया है। इसके लिए वह 20 लाख डॉलर तक चार्ज करेगा। इसका मतलब है कि बिजली संयंत्रों पर हमले के 48 घंटे के अल्टीमेटम से ईरान डरने वाला नहीं है और वह ट्रंप की शर्तों को नहीं मानेगा। ईरान की सेना के प्रवक्ता ने ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए कहा, “हे ट्रंप, यू आर फायर्ड।”
ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम से बढ़ी टेंशन
राष्ट्रपति ट्रंप अपनी धमकी को गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने इजरायली चैनल13 से कहा कि बिजली संयंत्रों पर अल्टीमेटम जल्द ही लागू होगा, और परिणाम ईरान के लिए बहुत बुरा और पूरी तरह विनाशकारी होगा। ट्रंप 48 घंटे की डेडलाइन खत्म होने के बाद कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। वहीं, इजरायली अधिकारियों ने भी कहा कि वे ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला करने में रुचि रखते हैं।
Hormuz Strait बंद होने से दुनिया में हाहाकार
Hormuz Strait वैश्विक तेल-गैस की आवाजाही के लिए सबसे महत्वपूर्ण रूट है, जो बीते 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के चलते प्रभावी रूप से बंद है। इस रूट से दुनिया में करीब 20% तेल और एलएनजी (LNG) गुजरता है। जंग के बीच इस रणनीतिक स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में आई रुकावट का बुरा असर दुनियाभर के देशों में देखने को मिल रहा है।
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