Iran-Israel Conflict: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच इजरायल ने सोमवार को ईरान के कई अहम इलाकों पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए। इन हमलों में राजधानी तेहरान, इस्फहान और दक्षिणी ईरान के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि ये हमले उस समय शुरू हुए जब तेहरान में हजारों लोग नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के समर्थन में सड़कों पर जुटे हुए थे।
Iran-Israel Conflict: तेहरान, इस्फहान और दक्षिणी ईरान में हमले
इजरायल की डिफेंस फोर्स (IDF) ने हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तेहरान, इस्फहान और दक्षिणी ईरान में “आतंकी शासन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर” पर बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई है। हालांकि इन हमलों में कितने लोगों की मौत या कितनी क्षति हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लेकिन हमलों के बाद पूरे इलाके में तनाव और डर का माहौल बन गया है।
नए सुप्रीम लीडर के समर्थन में जुटी भीड़
इजरायली हमले ऐसे समय पर हुए जब तेहरान के एंगहेलाब स्क्वायर पर हजारों लोग नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के समर्थन में इकट्ठा हुए थे। लोगों के हाथों में मोजतबा खामेनेई की तस्वीरें और ईरान के झंडे थे। भीड़ ने उनके समर्थन में नारे भी लगाए। दरअसल हाल ही में ईरान के लंबे समय तक सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। इस घोषणा के बाद देश के कई हिस्सों में उनके समर्थकों ने रैलियां और प्रदर्शन किए।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई की उम्र करीब 56 साल बताई जा रही है। उन्हें लंबे समय से ईरानी राजनीति में पर्दे के पीछे प्रभावशाली शख्स माना जाता रहा है। हालांकि उन्होंने कभी कोई बड़ा आधिकारिक राजनीतिक पद नहीं संभाला है, फिर भी सत्ता के गलियारों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई के ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के साथ करीबी संबंध हैं। यही वजह है कि उन्हें देश की सत्ता का स्वाभाविक उत्तराधिकारी भी माना जा रहा था।
उत्तराधिकार को लेकर उठे सवाल
मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाए जाने के फैसले पर ईरान के अंदर कुछ राजनीतिक नेताओं और बुद्धिजीवियों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि यह फैसला खानदानी परंपरा जैसा लगता है, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। दरअसल 1979 की क्रांति के बाद ईरान में राजशाही व्यवस्था को खत्म कर धार्मिक नेतृत्व की व्यवस्था स्थापित की गई थी। इसलिए कुछ आलोचकों का मानना है कि पिता के बाद बेटे को सत्ता देना उसी राजशाही जैसी व्यवस्था की ओर इशारा करता है।
सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे मोजतबा
युद्ध शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आए हैं। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि ईरानी सरकार की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मौजूदा हालात में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव पूरे मिडिल ईस्ट के लिए चिंता का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस संघर्ष का असर क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ सकता है।



















