Iran Israel War Latest Update: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से अपील की कि वे इस रणनीतिक मार्ग को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजें। इस पर भारत की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने अपना पक्ष साफ किया है।
Iran Israel War Latest Update: ट्रंप ने कई देशों से मांगी मदद
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त संकेत मिलने के बाद अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा में सहयोग करने की बात कही। राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों का नाम लेते हुए उम्मीद जताई कि ये देश अपने युद्धपोत भेजकर इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखने में भूमिका निभाएंगे। हालांकि अभी तक इन देशों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो किसी देश ने आधिकारिक तौर पर युद्धपोत भेजने की घोषणा की है और न ही इस दिशा में किसी बड़े कदम की पुष्टि हुई है।
भारत ने क्या कहा?
सोमवार, 16 मार्च 2026 को विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर कोई द्विपक्षीय चर्चा नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस मामले में अलग-अलग देशों के बीच चल रही बातचीत से अवगत है, लेकिन अमेरिका के साथ इस विषय पर सीधे तौर पर कोई चर्चा नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत स्थिति पर नजर बनाए हुए है और इस मामले में जुड़े विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत जारी रखेगा। यानी भारत फिलहाल संतुलित और सतर्क रुख अपनाए हुए है।
भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर भारत का भरोसा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इस मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत ने ईरान के साथ ऐसा कोई खास समझौता नहीं किया है, जिसके तहत भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की विशेष अनुमति मिली हो। उन्होंने बताया कि जहाजों की आवाजाही को लेकर ईरान से बातचीत जरूर जारी है और अब तक उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से भी यह साफ किया गया कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के बदले भारत ने कोई विशेष रियायत या सौदा नहीं किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह संभव हुआ है तो उसकी वजह भारत और ईरान के बीच सामान्य और कामकाजी संबंध हैं।
ईरान में फंसे भारतीयों को लेकर सरकार सक्रिय
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां रह रहे भारतीय नागरिकों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में भारत सरकार ईरान में मौजूद भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयासों में जुटी है। नई दिल्ली ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे सीमा पार कर आर्मेनिया पहुंचें, ताकि वहां से उनकी स्वदेश वापसी आसान बनाई जा सके। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि अब तक 550 से ज्यादा भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में मदद की जा चुकी है। उन्होंने इसके लिए आर्मेनिया सरकार और वहां की जनता का आभार भी जताया।
भारत की नीति?
पूरे घटनाक्रम को देखें तो भारत फिलहाल किसी सैन्य भूमिका में खुलकर सामने आने के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाता दिख रहा है। भारत की प्राथमिकता अपने जहाजों की सुरक्षा, ऊर्जा सप्लाई की निरंतरता और अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी है। यही वजह है कि भारत फिलहाल बयानबाजी से बचते हुए बातचीत और संतुलन की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
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