क्या ईरान ने तोड़ा सीजफायर? इस्लामाबाद मीटिंग से पहले डिलीट किया X पोस्ट!

Iran out Islamabad Talks

Iran out Islamabad Talks: ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही हलचल तेज हो गई है। इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बातचीत से ठीक पहले कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिलते हैं कि हालात अभी स्थिर नहीं हैं। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोगदम ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई अपनी एक पोस्ट हटा दी।

इस पोस्ट में उन्होंने जानकारी दी थी कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचने वाला है। पोस्ट हटाए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान वास्तव में इस वार्ता में शामिल होगा या फिर यह कोई रणनीतिक कदम है।

Iran out Islamabad Talks
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Iran out Islamabad Talks: ईरान के भीतर ही अलग-अलग राय

ईरान के अंदर भी इस मुद्दे पर एकराय नहीं दिख रही है। एक ओर जहां राजदूत बातचीत की बात कर रहे थे, वहीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबाफ ने इसे “अतार्किक” बताया है। उनका कहना है कि लेबनान में संघर्ष-विराम के उल्लंघन के चलते इस समय बातचीत का कोई मतलब नहीं है। इससे साफ है कि ईरान के अंदर ही इस वार्ता को लेकर मतभेद मौजूद हैं।

अमेरिका के साथ बातचीत पर सख्त बयान

तेहरान के मेयर अलीरजा जकानी ने भी अमेरिका के साथ बातचीत को बेकार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले किए गए वादों का पालन नहीं किया और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। जकानी ने ईरान के पूर्व नेता रुहोल्लाह खोमैनी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अब ईरानी बल किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

10 अप्रैल से प्रस्तावित वार्ता

यह शांति वार्ता 10 अप्रैल 2026 से इस्लामाबाद में शुरू होने वाली है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बैठक की पहल की है और वे इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इस बातचीत का उद्देश्य हाल ही में घोषित दो सप्ताह के संघर्ष-विराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना है। हालांकि वार्ता शुरू होने से पहले ही कई मुद्दों पर मतभेद सामने आ गए हैं।

ईरान की मांग है कि उसके सहयोगी समूहों पर हमले रोके जाएं और लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई बंद हो। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि संघर्ष-विराम सभी जगह लागू है, लेकिन इजरायल इस बात से सहमत नहीं है और वह लेबनान को इस समझौते का हिस्सा नहीं मानता। इन विरोधाभासी दावों के कारण स्थिति और जटिल हो गई है।

होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद

होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) इस पूरे विवाद का एक अहम मुद्दा बन गया है। ईरान ने संघर्ष-विराम के बावजूद इस मार्ग को पूरी तरह से नहीं खोला है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। तेल की कीमतों में वृद्धि और ईंधन की कमी की आशंका भी बढ़ रही है। ईरान अपनी योजना के तहत इस क्षेत्र पर नियंत्रण और निगरानी चाहता है, जबकि अमेरिका इसे पूरी तरह से खुला रखना चाहता है। ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र में समुद्री बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई हैं। ऐसे में अगर कोई जहाज निर्धारित मार्ग से हटकर गुजरता है, तो बड़े हादसे की आशंका हो सकती है।

इस स्थिति के कारण सैकड़ों तेल और गैस टैंकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ रहा है। इन सभी घटनाओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि शांति वार्ता से पहले ही माहौल काफी तनावपूर्ण है। राजनयिक स्तर पर उठाए गए कदम, अलग-अलग बयान और जमीनी हालात इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत आसान नहीं होगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान इस वार्ता में भाग लेता है या नहीं और क्या दोनों देश किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाते हैं।

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