Iran Protest News: ईरान में बीते पांच दिनों से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें धीरे-धीरे हिंसा भी देखने को मिली है। ईरान की सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों के पीछे पश्चिमी देशों की साजिश का आरोप लगाया है। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ आम विरोध नहीं, बल्कि इस्लामिक शासन को कमजोर करने की कोशिश है।
Iran Protest News: खुफिया एजेंसी ने पेश किए सबूत
खामेनेई से जुड़ी सैन्य खुफिया एजेंसी ने मीडिया के सामने कुछ सबूत रखे हैं। एजेंसी का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के पास जो हथियार मिले हैं, वे सीमा पार से तस्करी करके ईरान लाए गए हैं। इन हथियारों का इस्तेमाल प्रदर्शन के दौरान किया जा रहा था। सरकार का कहना है कि इससे साफ होता है कि बाहर से हालात बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

Iran Violent Protest: सीमा पार से आए हथियार
ईरान की खुफिया एजेंसी के अनुसार अब तक करीब 100 बंदूकें बरामद की गई हैं। एजेंसी का दावा है कि ये हथियार ईरान के अंदर नहीं बने, बल्कि पड़ोसी इलाकों के रास्ते तस्करी करके लाए गए हैं। जांच एजेंसियां अब उन लोगों की तलाश में हैं, जो इस हथियार तस्करी में शामिल हैं। ईरान का कहना है कि इन हथियारों के जरिए देश में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है।
Iran Protests Reason: 7 संदिग्ध एजेंट गिरफ्तार
सरकारी समाचार एजेंसियों तस्नीम और मेहर के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने 7 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर विदेशी ताकतों के लिए काम करने का आरोप है। इनमें से 5 लोगों के अमेरिका में मौजूद राजशाही समर्थक संगठनों से संपर्क बताए जा रहे हैं। वहीं, 2 अन्य लोग यूरोप में सक्रिय सरकार विरोधी समूहों से जुड़े हुए थे। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है।

Iran Protests Latest News: सरकार का सख्त रुख
ईरान की सरकार ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर इन प्रदर्शनों को सफल नहीं होने देगी। खामेनेई के सलाहकार जनरल हुसैन अशतरी ने कहा है कि देश के खिलाफ बड़ी साजिश रची जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे “अधिकार” जैसे नारों के पीछे छिपी विदेशी साजिशों को समझें और राष्ट्रीय एकता बनाए रखें।
विरोध की शुरुआत कैसे हुई?
ईरान में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत जल संकट और लगातार बढ़ती महंगाई से हुई थी। सबसे पहले व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जताई। बाद में छात्र, युवा और महिलाएं भी इस आंदोलन में शामिल हो गए। सरकार का कहना है कि शुरुआत में ये मुद्दों से जुड़े शांतिपूर्ण प्रदर्शन थे, लेकिन बाद में इन्हें संगठित आंदोलन का रूप दे दिया गया।

सरकार को क्यों है डर?
ईरान को आशंका है कि इन प्रदर्शनों के जरिए उसकी सरकार को गिराने की कोशिश की जा रही है। सरकार 1953 की उस घटना को भी याद दिला रही है, जब अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने ईरान में तख्तापलट में भूमिका निभाई थी। इसी वजह से मौजूदा हालात को लेकर सरकार बेहद सतर्क है और सख्ती से निपटने के मूड में है।
यह भी पढ़ें: यूक्रेन ने किया रूस के खेरसॉन में भीषण ड्रोन हमला, 24 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल


Download Android App
Download iOS App




