KGMU Conversion Racket: लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) प्रशासन और पुलिस ने मिलकर हस्साम अहमद नाम के एक फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ये मेडिकल यूनिवर्सिटी की हिंदू छात्राओं को धर्मांतरण रैकेट का शिकार बना रहा था। यह परिसर में फर्जी संगठन के नाम पर लोगों से खूब पैसे भी वसूल रहा था। आरोपी ने खुद को डॉक्टर बताकर ‘कार्डियो सेवा संस्थान ट्रस्ट’ बनाया और 50 से अधिक छात्राओं को दिल्ली एम्स (AIIMS) की कॉन्फ्रेंस में ले जाने के फर्जी लेटर थमाए थे। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि कैसे हस्साम लड़कियों को फंसता था और उसका क्या प्लान था।
KGMU Conversion Racket: डॉ. केके सिंह के फर्जी दस्तखत से बनाता था संपर्क
हस्साम अहमद फर्जी लेटर पैड और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके छात्राओं को मेडिकल कैंप के बहाने मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में ले जाता था। KGMU के डीन डॉ. केके सिंह की मदद से 20 अप्रैल को इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ और आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया।
आरोपी खुद को “भारतीय गौरव प्रतिभा सम्मान” से सम्मानित बताकर डॉक्टरों का भरोसा जीतता था। उसने प्रॉक्टर डॉ. केके सिंह के फर्जी दस्तखत और नकली सर्टिफिकेट बनाकर डॉक्टरों, खासकर मुस्लिम महिला डॉक्टरों से संपर्क बनाने की कोशिश की। वह कॉन्फ्रेंस के नाम पर लोगों को प्रभावित करता था।
KGMU Fake Doctor Case: छात्राओं को दिया था फर्जी कांफ्रेंस का झांसा

KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, इस मामले के तार धर्मांतरण और लड़कियों के शोषण से जुड़े हो सकते हैं। यह रैकेट KGMU की छात्राओं को निशाना बनाकर, उन्हें मुस्लिम इलाके में ‘मेडिकल कैंप’ के नाम पर ले जाता था। डॉ. केके सिंह ने खुद 19 अप्रैल को एक कैंप में जाकर पड़ताल की, जहां केजीएमयू की 10 छात्राएं मिली। जांच में पता चला कि हस्साम ने छात्राओं को दिल्ली एम्स में फर्जी कॉन्फ्रेंस का झांसा दिया था। जब AIIMS से संपर्क किया गया तो मालूम हुआ वहां कोई ऐसी कॉन्फ्रेंस नहीं है।
हस्साम के पास मिले अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज
पड़ताल में हस्साम के पास से केजीएमयू प्रशासन के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज और ‘कार्डियो सेवा संस्थान’ नामक फर्जी ट्रस्ट के पेपर मिले। इस संस्था का फाउंडर फईक अहमद मंसूरी है, जो इसी विश्वविद्यालय का छात्र है और अब शक के घेरे में ये भी हिअ। हस्साम ट्रस्ट का को-फाउंडर था। फ़िलहाल पुलिस इस मामले की ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण के एंगल से जांच कर रही है।
ऐसे फंसाता था हिन्दू छात्राओं को
हस्साम ने जालसाजी का एक नेटवर्क तैयार किया था। उसने हिंदू पैरामेडिकल स्टाफ और छात्राओं को ईमेल और डाक के जरिए दिल्ली एम्स में होने वाली इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का फर्जी निमंत्रण भेजा था।
आरोपी उन्हें भरोसा दिलाता था कि उनका चयन इस बड़े आयोजन के लिए हुआ है। जांच में पता चला कि वह KGMU के प्रवक्ता की फोटो (डीपी) लगाकर लोगों को प्रभावित करता था। उसने यह भी कबूल किया कि वह सोशल मीडिया के जरिए छात्राओं से संपर्क कर उन्हें अपने जाल में फंसाता था।
निशाने पर थी हिन्दू छात्राएं
डीन डॉ. केके सिंह के अनुसार, यह रैकेट हिन्दू छात्राओं को निशाना बना रहा था। आरोपी उन हिन्दू लड़कियों को सामाजिक सेवा के नाम पर प्रभावित करता था और मुस्लिमइलाके में कैंप में बुलाता था। एक छात्रा ने बताया कि वह इसे सिर्फ सामाजिक गतिविधि समझकर शामिल हुई थी। प्रशासन ने मामले के सभी पहलुओं, यहां तक कि लव जिहाद जैसे एंगल से भी जांच शुरू कर दी है। हालांकि, संस्थान का कहना है कि अभी तक शारीरिक शोषण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन जांच हर पहलू से की जा रही है।
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