Man Sentenced to Death for Rape and Murder of Minor Prayagraj : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में विशेष POCSO अदालत ने एक चर्चित मामले में कठोर निर्णय सुनाते हुए आठ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के दोषी मुकेश पटेल को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला प्रयागराज के सोरांव इलाके से जुड़ा है, जहां आरोपी ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। घटना के बाद इलाके में भारी रोष देखने को मिला था और लोगों ने दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
अदालत ने अपराध को बताया बेहद गंभीर
विशेष न्यायाधीश (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य और समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कठोरतम सजा ही न्याय के अनुरूप होती है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मृत्युदंड का अर्थ दोषी को फांसी पर लटकाकर मृत्यु देना होता है।
फैसला सुनाने से पहले अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुना। साथ ही मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, सबूतों और गवाहों के बयानों का विस्तार से परीक्षण किया गया। इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।
दुर्गा पूजा पंडाल से लौटते समय हुई थी घटना
मामला 3 अक्टूबर 2024 की शाम करीब 6:30 बजे का था, जब 8 साल की बच्ची शिवगढ़ चौराहे के पास लगे दुर्गा पूजा पंडाल में गई थी। वहां से घर लौटते समय वह अचानक लापता हो गई।
परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन 4 अक्टूबर 2024 को उसका शव गांव के मुन्ना पहलवान के धान के खेत में नग्न अवस्था में मिला। बच्ची का शव मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और बाद में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
घटना के बाद पीड़िता की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए मुकेश पटेल पर आरोप लगाया कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने जांच शुरू की और गवाहों के बयानों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह सामने आया कि आरोपी ने दुष्कर्म, हत्या और गंभीर यौन उत्पीड़न जैसे जघन्य अपराध किए हैं।
जांच के बाद दाखिल हुआ आरोप-पत्र
मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने 10 दिसंबर 2024 को अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया। इसके बाद 21 दिसंबर 2024 को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए और मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
साक्ष्यों और गवाहों की जांच पूरी होने के बाद अदालत ने 26 मार्च 2026 को आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद 30 मार्च 2026 को अदालत ने अंतिम आदेश जारी करते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने न्याय की दिशा में एक अहम कदम बताया है।
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