Noida Engineer हत्याकांड में 600 पन्नों का राज क्या ? SIT की शुरुआती रिपोर्ट ने खोला पूरा सच

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Noida Software Engineer Death: नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) आज अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। पिछले पांच दिनों से टीम रोज करीब आठ घंटे तक नोएडा अथॉरिटी कार्यालय में मौजूद रही और संबंधित विभागों से जानकारी जुटाती रही। इस दौरान पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी (DM), डीसीपी, एसीपी, फायर विभाग के अधिकारी और नोएडा अथॉरिटी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अथॉरिटी के सिविल और ट्रैफिक विभाग से जुड़े अधिकारी भी जांच में…

Noida Software Engineer Death: नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) आज अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। पिछले पांच दिनों से टीम रोज करीब आठ घंटे तक नोएडा अथॉरिटी कार्यालय में मौजूद रही और संबंधित विभागों से जानकारी जुटाती रही। इस दौरान पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी (DM), डीसीपी, एसीपी, फायर विभाग के अधिकारी और नोएडा अथॉरिटी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अथॉरिटी के सिविल और ट्रैफिक विभाग से जुड़े अधिकारी भी जांच में शामिल रहे।

Noida Software Engineer Death: SIT को सौंपे गए 600 से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज

जानकारी के मुताबिक नोएडा अथॉरिटी, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग ने मिलकर SIT को 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट और दस्तावेज दिए हैं। इन कागजों में घटनास्थल की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों की जिम्मेदारियों से जुड़ी जानकारी शामिल है। SIT की रिपोर्ट सामने आने के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। इसी वजह से अथॉरिटी के अलग-अलग विभागों में हलचल मची हुई है। बुधवार को SIT की टीम दोपहर 1:30 बजे से रात करीब 9 बजे तक अथॉरिटी ऑफिस में रही। इसी दौरान टीम ने घटना के चश्मदीद मुनेंद्र से भी कई घंटों तक पूछताछ की।

Noida Software Engineer Death (Image- Social Media)
Noida Software Engineer Death (Image- Social Media)

Yuvraj Mehta Case: ‘मेरा बेटा दो घंटे तक जिंदगी के लिए लड़ता रहा’

युवराज मेहता की याद में हुई शोक सभा के बाद उनके पिता पहली बार मीडिया के सामने आए। उनकी आंखों में आंसू थे और आवाज में इंसाफ की गुहार। उन्होंने मीडिया और सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि सिस्टम की लापरवाही ने उनका बेटा उनसे छीन लिया। भावुक होकर उन्होंने बताया कि युवराज कमजोर नहीं था। पानी से भरे अंधेरे गड्ढे में गिरने के बाद भी उसने करीब दो घंटे तक संघर्ष किया। वह लगातार कोशिश करता रहा कि कोई उसे बाहर निकाले, लेकिन वहां मौजूद लोग एक-दूसरे की तरफ देखते रहे।

SIT investigation Noida: समय पर मदद मिलती तो बच सकती थी जान

युवराज के पिता ने कहा कि अगर कोई समय पर पानी में कूद जाता या वहां सही सुरक्षा व्यवस्था होती तो उनका बेटा आज जिंदा होता। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद भी तुरंत राहत कार्य नहीं हुआ। उनका कहना था कि ऐसी जगहों पर पहले से सुरक्षा इंतजाम होना जरूरी था, लेकिन किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली।

Noida Software Engineer Death (Image- Social Media)
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Greater Noida Accident News: चश्मदीद मुनेंद्र की बहादुरी की सराहना

शोक सभा में युवराज के पिता ने चश्मदीद मुनेंद्र की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि मुनेंद्र ने बिना अपनी जान की परवाह किए पानी में छलांग लगाई और युवराज को बचाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वे उस लड़के का एहसान जिंदगी भर नहीं भूलेंगे। संसाधनों की कमी के कारण मुनेंद्र चाहकर भी युवराज को बचा नहीं सका।

SIT रिपोर्ट से खुलेगा सच

अब सभी की नजर SIT की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है, बिल्डर, नोएडा अथॉरिटी या प्रशासन की लापरवाही। SIT अब तक करीब 125 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिनमें मुनेंद्र समेत कई अधिकारी और प्रत्यक्षदर्शी शामिल हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।