“जो सनातन को रोकेगा, उसे डिफेंडर और पोर्शे से कुचल देंगे…”, कौन है सतुआ बाबा? जिन्होंने विरोधियों को दी खुली चेतावनी

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Satua Baba in Magh Mela 2026: माघ मेले में अपनी डिफेंडर और पोर्शे जैसी महंगी गाड़ियों से सुर्ख़ियों में रहने वाले सतुआ बाबा ने विरोधियों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि लोग ये समझ लें कि सनातन केवल धर्म नहीं है, बल्कि अर्थ, शास्त्र, सहत्र और रफ़्तार का प्रतिक है। अब जो भी इस सनातन की रफ्तार को रोकेगा, उसे इन्हीं गाड़ियों से कुचल दिया जाएगा। सतुआ बाबा ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद में पड़ना नहीं है, बल्कि अपने पड़ाव तक पहुंचना है। उन्होंने कहा, गाड़ी चाहे कोई भी हो, लेकिन उसकी रफ्तार से उन लोगों…

Satua Baba in Magh Mela 2026: माघ मेले में अपनी डिफेंडर और पोर्शे जैसी महंगी गाड़ियों से सुर्ख़ियों में रहने वाले सतुआ बाबा ने विरोधियों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि लोग ये समझ लें कि सनातन केवल धर्म नहीं है, बल्कि अर्थ, शास्त्र, सहत्र और रफ़्तार का प्रतिक है। अब जो भी इस सनातन की रफ्तार को रोकेगा, उसे इन्हीं गाड़ियों से कुचल दिया जाएगा।

सतुआ बाबा ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद में पड़ना नहीं है, बल्कि अपने पड़ाव तक पहुंचना है। उन्होंने कहा, गाड़ी चाहे कोई भी हो, लेकिन उसकी रफ्तार से उन लोगों को जवाब दिया जाएगा जो जातियों में बांटने, समाज को तोड़ने और राम पर गोलियां चलाने का काम करते हैं। आइए जानते हैं, कौन है सतुआ बाबा जिहोने विरोधियों को दी चेतावनी।

माघ मेले में सतुआ बाबा को डिफेंडर और पोर्शे जैसी महंगी और लग्ज़री गाड़ियों में चलता देख इंटरनेट पर सवाल उठने लगे थे। कई लोगों ने संत परंपरा और सादगी को लेकर सवाल खड़े किए। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए सतुआ बाबा ने कहा कि उन्हें गाड़ियों की कीमत और नाम की जानकारी नहीं है। अगर ये सब जानना है तो उनके लिए गूगल बाबा है। मेरा काम गाड़ियों से चलना, अपनी गति बनाए रखना और अपने पड़ाव तक पहुंचना है।

Prayagraj Magh Mela: भारत का सनातन धर्म इतना कमजोर नहीं

Satua Baba in Magh Mela 2026
Prayagraj Magh Mela (Image- Social Media)

सतुआ बाबा ने तीखे शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भारत का सनातन धर्म इतना कमजोर हो गया है कि किसी के गाड़ियों में बैठने से ही उसे गलत ठहराया जाने लगे। उन्होंने साफ कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है और यहां स्वतंत्रता का राज है, जिसे जो समझना है, वह समझे।

उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज सवाल खड़े कर रहे हैं, वही लोग कभी गरीब की कुटिया तक बिजली नहीं पहुंचा पाए, भूखे को भोजन नहीं दे सके और देश की सड़कों को रफ्तार नहीं दे पाए। सतुआ बाबा ने जोर देकर कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भारत है, जहां विकास की गति तेज है और आने वाले समय में यह रफ्तार और भी तेज होती जाएगी।

Satua Baba German Porsche Car: ‘गाड़ियों की कीमत मुद्दा नहीं’

महंगी गाड़ियों पर चर्चा के बीच सतुआ बाबा ने कहा कि उनके लिए गाड़ियों की कीमत मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि JCB भी महंगी है, ठेला भी महंगा है, बुलट भी महंगी है, डिफेंडर भी महंगी है और फरारी भी महंगी है। उन्होंने कहा कि विषय गाड़ी का नहीं, बल्कि लक्ष्य का है। लक्ष्य है पड़ाव तक पहुंचना और सनातन ध्वज को आगे बढ़ाना। सतुआ बाबा ने माघ मेले के आयोजन को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ की सरहाना की।

Satua Baba Defender: कौन है सतुआ बाबा?

Satua Baba in Magh Mela 2026
Satua Baba Defender (Image- Social Media)

सतुआ बाबा उर्फ़ संतोष दास जी महाराज हमेशा पीले कपड़ों में दिखाई देते हैं। वह अक्सर सीएम योगी आदित्यनाथ के अगल-बगल नजर आते हैं। आजकल वह अपनी महंगी कारों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी छाए हुए हैं। बहुत से लोग जानते हैं कि वह कशी के रहने वाली सीएम योगी के करीबी संत हैं। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ इतनी नहीं है।

मणिकर्णिका घाट पर दूर से दिखने वाली एक इमारत सतुआ बाबा का स्थायी आश्रम है। इस पीठ की स्थापना साल 1803 में हुई थी। इसकी स्थापना गुजरात के रहने वाले संत जेठा पटेल ने की थी, उन्होंने जिस आश्रम की स्थापना की, उस आश्रम के मुखिया को सतुआ बाबा कहते हैं। आज उसी पीठ के मुखिया संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा हैं।

UP Samachar: सतुआ बाबा उर्फ़ संतोष दास का इतिहास

Satua Baba in Magh Mela 2026
UP Samachar (Image- Social Media)

संतोष दास यूपी के ललितपुर ज़िले के साधारण ब्राह्मण परिवार से आते हैं। वह मात्र 11 साल की उम्र में परिवार छोड़ काशी आ गए थे। यहां उनका जुड़ाव सतुआ बाबा से हो गया। वैष्णव संप्रदाय के निर्मोही अखाड़े से जुड़े इस पीठ के मुखिया ने संतोष दास की प्रतिभा देख उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना दिया। संतोष दास मात्र 19 साल की उम्र में महामंडलेश्वर बन गए, जो अबतक के इतिहास में सबसे कम उम्र में दी गई महामंडलेश्वर की उपाधि थी।

सबसे कम उम्र में महामंडलेश्वर बने संतोष दास के गुरु के साकेतवासी होने के बाद उनके उत्तराधिकारी संतोष दास जी महाराज सतुआ बाबा बन गए। उन्होंने ऊपर पीठ को बचाने और आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी थी। उन्होंने न सिर्फ अपनी ज़िम्मेदारी निभाई बल्कि सनातन के कामों को आगे बढ़ाया और बीते महाकुंभ में सबसे कम उम्र में जगतगुरु की पदवी भी हासिल की।

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Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।