अयोध्या में ‘शबरी रसोई’ चला रही गुजरात की ‘कवच’ कम्पनी पर बड़ी कार्रवाई, फूड कोर्ट सील, 6 महीनों से लगभग 1.5 करोड़ रुपये का किराया था बकाया

Summary :

Shabri Rasoi Sealed in Ayodhya : रामनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराने वाली प्रसिद्ध ‘शबरी रसोई’ पर अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने सख्त कदम उठाया है। कई महीनों से किराया जमा न होने और नोटिसों की अनदेखी के बाद प्राधिकरण ने टेढ़ी बाजार वेस्ट स्थित फूड कोर्ट को सील कर दिया। यह रसोई गुजरात के अहमदाबाद की निजी कंपनी ‘कवच’ द्वारा संचालित की जा रही थी। Shabri Rasoi Sealed in Ayodhya: छह महीने से डेढ़ करोड़ रुपये का बकाया अयोध्या विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता आलोक कुमार सिंह के मुताबिक, शबरी रसोई पर पिछले करीब छह महीनों से…

Shabri Rasoi Sealed in Ayodhya : रामनगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराने वाली प्रसिद्ध ‘शबरी रसोई’ पर अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने सख्त कदम उठाया है। कई महीनों से किराया जमा न होने और नोटिसों की अनदेखी के बाद प्राधिकरण ने टेढ़ी बाजार वेस्ट स्थित फूड कोर्ट को सील कर दिया।

यह रसोई गुजरात के अहमदाबाद की निजी कंपनी ‘कवच’ द्वारा संचालित की जा रही थी।

Shabri Rasoi Sealed in Ayodhya: छह महीने से डेढ़ करोड़ रुपये का बकाया

Shabri Rasoi Sealed in Ayodhya
Shabri Rasoi Sealed in Ayodhya (Source: Social Media)

अयोध्या विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता आलोक कुमार सिंह के मुताबिक, शबरी रसोई पर पिछले करीब छह महीनों से लगभग 1.5 करोड़ रुपये का किराया बकाया था।

इस परियोजना को कंपनी को 10 साल की लीज पर दिया गया था और इसका तिमाही किराया 28.50 लाख रुपये तय किया गया था।

प्राधिकरण का कहना है कि बकाया राशि को लेकर कंपनी को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आखिरकार सीलिंग की कार्रवाई करनी पड़ी।

Shabri Rasoi Sealed in Ayodhya: अयोध्या में चार जगह चला रही थी फूड कोर्ट

प्राधिकरण के अनुसार, इससे पहले भी श्रद्धालुओं से भोजन के नाम पर अधिक पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर भी कंपनी को नोटिस भेजे गए थे।

गुजरात की कवच कंपनी अयोध्या के चार प्रमुख स्थानों पर फूड कोर्ट संचालित कर रही है, जिनमें शामिल हैं:

  • टेढ़ी बाजार (रेलवे स्टेशन के पास) – जहां कार्रवाई करते हुए फूड कोर्ट सील किया गया
  • सूर्यकुंड
  • गुप्तार घाट
  • कौशलेश कुंज

प्राधिकरण के मुताबिक इन सभी स्थानों का किराया कुछ-कुछ बकाया था, जो मिलकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

कंपनी ने दावों को किया खारिज

वहीं कवच कंपनी के अधिकारियों ने प्राधिकरण के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वह विकास प्राधिकरण की साझेदार (पार्टनर) है, न कि सामान्य किराएदार।

कंपनी के मुताबिक, चार में से दो स्थान अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं, जिसकी वजह से कुछ समस्याएं हैं। उनका दावा है कि उन्होंने अपनी ओर से जरूरी शर्तों का पालन किया है और दोनों पक्षों के बीच कोई बड़ा विवाद नहीं है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।