जापान में 62.6 प्रतिशत युवा नहीं चाहते बच्चे, सरकार ने स्थिति को बताया ‘साइलेंट इमरजेंसी’

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Silent Emergency in Japan : जापान में लगातार गिरती जन्मदर के बीच एक नए सर्वे ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। ताजा रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में युवा अब माता-पिता बनने से बचना चाहते हैं। दिसंबर 2025 में दवा कंपनी Rohto Pharmaceutical द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया कि 18 से 29 साल के अविवाहित युवाओं में 62.6 प्रतिशत ने कहा कि वे बच्चे नहीं चाहते। यह आंकड़ा 2024 के 56.6 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। आर्थिक दबाव और करियर की चिंता सर्वे में शामिल करीब 400 युवाओं ने इसके पीछे कई कारण बताए। उनमें…

Silent Emergency in Japan : जापान में लगातार गिरती जन्मदर के बीच एक नए सर्वे ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। ताजा रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में युवा अब माता-पिता बनने से बचना चाहते हैं। दिसंबर 2025 में दवा कंपनी Rohto Pharmaceutical द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया कि 18 से 29 साल के अविवाहित युवाओं में 62.6 प्रतिशत ने कहा कि वे बच्चे नहीं चाहते। यह आंकड़ा 2024 के 56.6 प्रतिशत से काफी ज्यादा है।

आर्थिक दबाव और करियर की चिंता

सर्वे में शामिल करीब 400 युवाओं ने इसके पीछे कई कारण बताए। उनमें सबसे प्रमुख कारण आर्थिक दबाव, करियर पर संभावित असर और बच्चों की परवरिश से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर चिंता हैं। कुछ प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर गर्भावस्था और बच्चों की परवरिश से जुड़े अनुभव देखने के बाद वे इस जिम्मेदारी को लेकर और ज्यादा चिंतित महसूस करते हैं।

महिलाओं में ज्यादा दिखी अनिच्छा

जेंडर के आधार पर देखें तो महिलाओं में बच्चों के प्रति अनिच्छा ज्यादा देखी गई। सर्वे के अनुसार 64.7 प्रतिशत महिलाएं बच्चे नहीं चाहतीं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 60.7 प्रतिशत रहा। जब 2020 में यह सर्वे शुरू हुआ था, तभी पहली बार महिलाओं का प्रतिशत पुरुषों से अधिक दर्ज किया गया था।

सरकार ने शुरू की योजना

आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। 2020 में केवल 44 प्रतिशत युवाओं ने बच्चे नहीं चाहने की बात कही थी। 2023 में यह आंकड़ा पहली बार 50 प्रतिशत से ऊपर पहुंचकर 55.2 प्रतिशत हो गया। 2025 में यह बढ़कर 62.6 प्रतिशत तक पहुंच गया।

घटती जन्मदर से निपटने के लिए जापान सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें चाइल्डकेयर भत्ता बढ़ाना, मातृत्व और पितृत्व अवकाश के दौरान अतिरिक्त लाभ देना और परिवारों को आर्थिक सहायता देना शामिल है।

इसके बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। Ministry of Health, Labour and Welfare के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में जापान में केवल 705,809 बच्चों का जन्म हुआ, जो लगातार दसवें साल का सबसे निचला स्तर है।

‘मूक आपातकाल’ बताया गया संकट

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने फरवरी में इस स्थिति को “साइलेंट इमरजेंसी” यानी मूक आपातकाल बताया था। उनका कहना है कि अगर जन्मदर में गिरावट जारी रही, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर गंभीर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार युवाओं की आर्थिक असुरक्षा, काम और निजी जीवन के संतुलन तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़ी चुनौतियों को दूर नहीं करती, तो आने वाले वर्षों में जापान की जनसंख्या में गिरावट और तेज हो सकती है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।