‘हड्डी न टूटे और चोट के घाव न हो…’, अफगानिस्तान में अब महिलाओं को पीटना जुर्म से हुआ बाहर! इस नए तालिबानी कानून से नर्क बनी ज़िंदगी

Summary :

Taliban New Rule on Domestic Violence: अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से महिलाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। अब तालिबान द्वारा लागू किए गए नए पीनल कोड ने हालात को और गंभीर बना दिया है। यह कानून महिलाओं के अधिकारों को सीमित करता है और घरेलू हिंसा जैसे मामलों को भी एक तरह से वैधता देता दिखाई देता है। नीचे इस पूरे मुद्दे को सरल शब्दों में समझाया गया है। Taliban New Rule on Domestic Violence: तालिबान शासन में महिलाओं बुरा हाल Taliban के दोबारा सत्ता में आने के बाद महिलाओं पर कई तरह…

Taliban New Rule on Domestic Violence: अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से महिलाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। अब तालिबान द्वारा लागू किए गए नए पीनल कोड ने हालात को और गंभीर बना दिया है। यह कानून महिलाओं के अधिकारों को सीमित करता है और घरेलू हिंसा जैसे मामलों को भी एक तरह से वैधता देता दिखाई देता है। नीचे इस पूरे मुद्दे को सरल शब्दों में समझाया गया है।

Taliban New Rule on Domestic Violence: तालिबान शासन में महिलाओं बुरा हाल

Taliban New Rule on Domestic Violence ( source : social media)
Taliban New Rule on Domestic Violence ( source : social media)
  • Taliban के दोबारा सत्ता में आने के बाद महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गईं।
  • उन्हें शिक्षा, नौकरी और सार्वजनिक जीवन से लगभग बाहर कर दिया गया।
  • घर से बाहर निकलने के लिए भी सख्त नियम बनाए गए। बिना जरूरी कारण बाहर जाने की अनुमति नहीं है और कई मामलों में पुरुष अभिभावक का साथ जरूरी माना गया है।
  • इन प्रतिबंधों ने महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता पर गहरा असर डाला है।
  • पहले से मौजूद कठिनाइयों के बीच अब नया कानून उनकी परेशानियों को और बढ़ा रहा है।

Taliban Afghanistan Women Crisis: नया पीनल कोड और घरेलू हिंसा

Taliban New Rule on Domestic Violence ( source : social media)
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  • तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा द्वारा हस्ताक्षरित नए पीनल कोड में घरेलू हिंसा से जुड़े प्रावधानों ने चिंता बढ़ा दी है।
  • कानून के अनुसार, पति अपनी पत्नी या बच्चों को शारीरिक सजा दे सकता है, बशर्ते इससे हड्डी न टूटे और कोई खुला घाव न हो।
  • अगर पति द्वारा मारपीट की जाती है और महिला अदालत में इसे साबित कर देती है, तो भी सजा बेहद हल्की है, सिर्फ 15 दिन की जेल।
  • यह भी तब संभव है जब महिला अपने जख्म अदालत में दिखा सके।
  • इसके उलट, यदि कोई विवाहित महिला अपने पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने चली जाए, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है।
  • इससे साफ है कि कानून में महिलाओं के लिए सख्ती अधिक है।

Taliban Afghanistan News: समाज को वर्गों में बांटने वाला प्रावधान

Taliban New Rule on Domestic Violence ( source : social media)
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  • इस पीनल कोड का आर्टिकल 9 अफगान समाज को चार वर्गों में बांटता है, उलेमा (धार्मिक विद्वान), अशरफ (एलीट वर्ग), मिडिल क्लास और लोअर क्लास।
  • चिंताजनक बात यह है कि एक ही अपराध के लिए सजा अपराध की गंभीरता के आधार पर नहीं, बल्कि आरोपी के सामाजिक दर्जे के अनुसार तय की जाती है।
  • यदि कोई धार्मिक विद्वान अपराध करता है, तो उसे केवल सलाह दी जाती है।
  • एलीट वर्ग के व्यक्ति को अदालत में बुलाकर चेतावनी दी जाती है।
  • मिडिल क्लास के लिए जेल की सजा हो सकती है।
  • लोअर क्लास के लोगों को जेल के साथ शारीरिक दंड भी दिया जा सकता है।
  • यह व्यवस्था समान न्याय के सिद्धांत के खिलाफ मानी जा रही है।

पुराने कानून को किया रद्द

  • नए 90 पन्नों के इस कानून ने 2009 में लागू महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने वाले कानून (EVAW) को समाप्त कर दिया है।
  • यह कानून पूर्व सरकार के समय लाया गया था।
  • अब गंभीर अपराधों में सजा देने का अधिकार इस्लामिक मौलवियों को दिया गया है, न कि किसी स्वतंत्र न्यायिक संस्था को।
  • साथ ही, इस नए कोड पर चर्चा करना भी अपराध माना गया है। इससे लोगों में डर का माहौल है और खुलकर विरोध करना मुश्किल हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

Taliban New Rule on Domestic Violence ( source : social media)
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  • अफगानिस्तान का मानवाधिकार संगठन रवादारी, जो देश के बाहर से काम कर रहा है, ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई है।
  • उसने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे इस कानून को लागू होने से रोकने के लिए कदम उठाएं।
  • महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर रीम अलसलेम ने भी इस कानून को बेहद चिंताजनक बताया है।
  • फिलहाल, अफगानिस्तान में इस कानून को लेकर डर और असंतोष का माहौल है।
  • अब सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय कोई ठोस कदम उठाएगा और अगर उठाएगा, तो कब?

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।