‘Freebie की जगह रोजगार दें सरकार’, जानिए राज्य सरकारों के मुफ़्त योजनाओं पर क्या क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

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CJI Suryakant on Free Schemes : मुफ़्त योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों पर सख्त टिप्पणी की है। गुरुवार को राज्यों में राजनीतिक दलों द्वारा अपनाई जा रही “मुफ्त योजनाओं” की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे आर्थिक विकास में बाधा आती है और ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों की सरकारें कर्जे और घाटे में है उसके बावजूद मुफ़्त योजनाएं चला रही हैं, जिसकी बजाय रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने किया। CJI Suryakant on Free…

CJI Suryakant on Free Schemes : मुफ़्त योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों पर सख्त टिप्पणी की है। गुरुवार को राज्यों में राजनीतिक दलों द्वारा अपनाई जा रही “मुफ्त योजनाओं” की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे आर्थिक विकास में बाधा आती है और ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों की सरकारें कर्जे और घाटे में है उसके बावजूद मुफ़्त योजनाएं चला रही हैं, जिसकी बजाय रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने किया।

CJI Suryakant on Free Schemes : क्यों कहा सुप्रीम कोर्ट ने

CJI Suryakant on Free Schemes
CJI Suryakant on Free Schemes (source : social media)

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की बेंच तमिलनाडु की बिजली कंपनी से जुड़े एक मामले पर सुनवाई कर रही थी। बिजली कंपनी की ओर से यह कहा गया कि हमने टैरिफ की दरें पहले ही तय कर दी थीं. बाद में सरकार की ओर से यह कहा गया कि हमने बिजली फ्री कर दी है.

इस पर सीजेआई ने संज्ञान लेते हुए कहा “राज्यों द्वारा गरीबों की सहायता करना समझ में आता है। मगर ऐसी योजनाओं के माध्यम से संसाधन बांटने के बजाय, दलों को ऐसी सुनियोजित नीतियां लागू करनी चाहिए जो लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उपाय प्रदान करें, जैसे बेरोजगारी योजनाएं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा, “देश के अधिकांश राज्य राजस्व घाटे वाले राज्य हैं और फिर भी वे विकास की अनदेखी करते हुए ऐसी मुफ्त योजनाएं पेश कर रहे हैं।

“इस तरह के मुफ्त वितरण से देश का आर्थिक विकास बाधित होगा। हां, यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुविधाएं प्रदान करे। लेकिन जो लोग मुफ्त सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं… क्या इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है?”

सीजेआई सूर्यकांत ने देश में फ्रीबीज सिस्टम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह से फ्रीबीज बांटने पर देश का आर्थिक विकास रुकेगा. कुछ लोग एजुकेशन या बेसिक लाइफ़ अफ़ोर्ड नहीं कर सकते. उन लोगों को सुविधा देना राज्य का फ़र्ज़ है, लेकिन फ्रीबीज पहले उनकी जेब में जा रहे हैं जो लोग मजे कर रहे हैं. क्या यह ऐसी चीज नहीं है जिस पर सरकार का ध्यान जाना चाहिए?

Supreme Court on Rally : “कैश ट्रांसफर कर रहे हैं”

CJI Suryakant on Free Schemes
CJI Suryakant on Free Schemes (source : social media)

सीजेआई ने आगे कहा कि राज्य को एम्प्लॉयमेंट के रास्ते खोलने के लिए काम करना चाहिए. अगर आप सुबह से फ्री खाना देना शुरू करते हैं फिर फ्री साइकिल, फिर फ्री बिजली और अब हम एक ऐसे स्टेज पर पहुंच रहे हैं जहां हम सीधे लोगों के अकाउंट में कैश ट्रांसफर कर रहे हैं. सोचिए, ज्यादातर राज्य रेवेन्यू डेफिसिट में हैं लेकिन फिर भी सिर्फ इन पॉलिसीज की वजह से वे मजबूर हैं. फिर डेवलपमेंट के लिए कोई पैसा नहीं तो सिर्फ दो काम हो रहे हैं. एक तो अफसरों को सैलरी देना और इन पॉलिसी के लिए पेमेंट करना.

उन्होंने आगे कहा, “राज्य घाटे में चल रहे हैं, फिर भी मुफ्त सुविधाएं दे रहे हैं। देखिए, आप एक साल में जो राजस्व इकट्ठा करते हैं, उसका 25 प्रतिशत राज्य के विकास के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता?”

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सभी राज्यों से संबंधित है। “हम किसी एक राज्य की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि सभी राज्यों की बात कर रहे हैं। यह नियोजित व्यय है। आप बजट प्रस्ताव क्यों नहीं बनाते और यह औचित्य क्यों नहीं देते कि यह बेरोजगारी पर मेरा खर्च है?”

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने आगे कहा, ‘हम किस तरह की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं?’

Justice CJI Suryakant : खर्च के तरीके पर बोले जस्टिस बागची

जस्टिस बागची ने कहा कि अगर आप कोई पॉलिसी डिसीजन लेते हैं तो आपकी दलील दिखाती है कि प्लान्ड बनाम अनप्लान्ड खर्च क्या है. अगर आप सच में यह सब करना चाहते हैं तो इसे बजट में डालें और फिर बताएं कि आप ऐसा कैसे करेंगे.

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।