ट्रम्प टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट में धूल चटाने के बाद, अब नील कत्याल 133 अरब डॉलर भी वापस करवाएंगे? आइए जानते हैं कहां आ सकती है अड़चन

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Task Force For Tariff Refund : अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए टैरिफ को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। यह फैसला 6-3 के बहुमत से लिया गया, जिसके बाद ट्रम्प के टैरिफ लगाने और दुनिया को ट्रेड की हेकड़ी दिखाने पर जोरदार प्रहार हुआ। कोर्ट ने माना कि ट्रम्प के लगाए टैरिफ को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर ऐक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। यह शक्ति केवल कांग्रेस को है। बता दें ट्रम्प ने अमेरिका को ‘ग्रेट’ बनाने के लिए टैरिफ को टूल के तौर पर इस्तेमाल किया था। सत्ता में वापस लौटने…

Task Force For Tariff Refund : अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए टैरिफ को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। यह फैसला 6-3 के बहुमत से लिया गया, जिसके बाद ट्रम्प के टैरिफ लगाने और दुनिया को ट्रेड की हेकड़ी दिखाने पर जोरदार प्रहार हुआ। कोर्ट ने माना कि ट्रम्प के लगाए टैरिफ को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर ऐक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। यह शक्ति केवल कांग्रेस को है।

बता दें ट्रम्प ने अमेरिका को ‘ग्रेट’ बनाने के लिए टैरिफ को टूल के तौर पर इस्तेमाल किया था। सत्ता में वापस लौटने के बाद से ट्रम्प अन्य देशों से अपनी बात मनवाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा था। हालांकि यह ट्रम्प की पहली बड़ी नीति है जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती मिली और टैरिफ के ट्रम्प के हथकंडों को विराम लगा। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे यूनाइटेड स्टेट्स के पूर्व एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल का हाथ है जो भारतीय मूल के हैं।

Task Force For Tariff Refund : क्या मिलेगा रिफ़ंड?

Task Force For Tariff Refund
Task Force For Tariff Refund (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

जैसे ही यह फैसला आया उसके तुरंत बाद से सवाल उठने लगे कि क्या ट्रम्प द्वारा लगाए टैरिफ में हुए नुकसान से व्यवसायों और आयातकों को रिफ़ंड मिलेगा?

इसे लेकर अब नील कत्याल ने एक नया कानूनी दल बनाया है। यह दल उन व्यवसायों और आयातकों की मदद करेगा जिन्हें ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण नुकसान हुआ है। कत्याल ने यह घोषणा 23 फरवरी को की। कत्याल ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा, ‘हमने सीधे तौर पर रिफंड की मांग नहीं की थी, क्योंकि हमारी कानूनी टीम को उम्मीद थी कि केस जीतने पर रिफंड अपने आप मिल जाएगा।’

उन्होंने आगे कहा, ‘आज हम उन रिफंड के लिए लड़ने के लिए एक टास्क फोर्स लॉन्च कर रहे हैं। अगर संघीय सरकार उस पैसे को वापस करने से मना करती है, तो हम उसके लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।’

US Tariff Refund : ट्रम्प ने किया था पवार का गलत इस्तेमाल

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Task Force For Tariff Refund (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

बता दें, कोर्ट ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि टैक्स लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है। इस फैसले ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाली एक व्यापार रणनीति को बड़ा झटका दिया और कई देशों के साथ संबंधों में खटास ला दी थी। जिसके बाद नील कात्याल ने कानूनी दल बनाने की बात कही।

15% टैरिफ पर भी सवाल

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Task Force For Tariff Refund (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

बता दें, अमेरिकी कोर्ट के आदेश के बाद ट्रंप ने पहले 10 फीसदी और फिर उसे बढ़ाकर 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। नील कात्याल ने अब इस 15% वैश्विक टैरिफ की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाया है।

उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस को दरकिनार कर ऐसे व्यापक उपाय लागू नहीं कर सकते। कत्याल का तर्क है कि अगर कोई नीति सही है, तो उसे संवैधानिक तरीकों से ही लागू किया जाना चाहिए। दरअसल, अमेरिकी संविधान में इस तरह के फैसले संसद से पास कराने पड़ते हैं, जिस पर ट्रम्प ने स्वीकृति नहीं ली थी।

Neel Katyal Lawyer Statement : क्या हो सकता है रिफ़ंड

बहरहाल, दावा तो किया जा रहा है कि वे व्यवसायों और आयातकों के हरजाने को चुकाने के लिए लड़ेंगे, मगर यह काम होना इतना आसान नहीं। इस से जुड़े दावों को अमेरिका सीमा शुल्क और बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी को संभालना होगा, जो इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट और निचली अदालतों से जुड़ा मामला है। इसमें एक पेच यह है कि इसमें उपभोक्ता सीधे जुड़े हैं, क्योंकि जब टैरिफ बढ़ाए जा रहे थे तो उस टैरिफ की कीमत को उपभोक्ताओं ने चुकाया था। यानि बिसनेस में जो बढ़ी कीमतें है उसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा था जिस चलते उपभोक्ताओं को पैसा डायरेक्ट भेजना आसान नहीं है।

हाँ लेकिन इलियानेस और नेवादा के गवर्नर ने राज्य के परिवारों के लिए टैरिफ से हुए घाटे की मांग की है। बताया जा रहा है कि टैरिफ से 133 अरब डॉलर वसूल किए गए।

जानिए कौन हैं नील कत्याल ?

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इस बीच जानिए नील कत्याल के बारे में जिन्होंने ट्रम्प को झुकने पर मजबूर किया। नील कत्याल भारतीय मूल के हैं और उनके माता-पिता भारत से अमेरिका गए थे। उनकी मां डॉक्टर हैं और पिता इंजीनियर। उनका जन्म 12 मार्च 1970 को शिकागो में हुआ था। कत्याल ने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएशन किया और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क का काम किया। साल 2010 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नील कत्याल को अपना एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल बनाया था। उन्होंने अभी तक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा बड़े केस लड़े हैं जो किसी भी अल्पसंख्यक वकील (minority attorney) के लिए एक रेकॉर्ड है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।