तिरंगे की शान, राष्ट्र निर्माण का संकल्प: जिंदल स्टील में गूंजा देशभक्ति का जज्बा

Summary :

जिंदल स्टील लिमिटेड के मशीनरी डिविजन, रायपुर के मंदिर हसौद स्थित कारखाना परिसर में 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति, गौरव और उत्साह के वातावरण में मनाया गया। तिरंगे की आन-बान-शान के बीच आयोजित समारोह में कंपनी प्रबंधन, अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवारजन बड़ी संख्या में शामिल हुए।

रायपुर, 15 अगस्त। जिंदल स्टील लिमिटेड के मशीनरी डिविजन, रायपुर के मंदिर हसौद स्थित कारखाना परिसर में 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति, गौरव और उत्साह के वातावरण में मनाया गया। तिरंगे की आन-बान-शान के बीच आयोजित समारोह में कंपनी प्रबंधन, अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवारजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से सराबोर नजर आया। समारोह का शुभारंभ अनुशासित मार्च पास्ट से हुआ। इसके बाद गरिमामय वातावरण में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। तिरंगे के सम्मान में उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रगान के साथ देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

तिरंगे के लिए नवीन जिंदल का ऐतिहासिक संघर्ष

प्लांट हेड श्री नीलेश टी. शाह ने सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आजादी का पर्व केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारी को समझने और उसे पूरी निष्ठा से निभाने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने जिंदल स्टील की भविष्य की विकास योजनाओं और रणनीतिक दिशा पर भी विचार साझा किए। अपने संबोधन में श्री शाह ने चेयरमैन श्री नवीन जिंदल के तिरंगे के प्रति समर्पण और उनके ऐतिहासिक संघर्ष को विशेष रूप से याद किया।

उन्होंने कहा कि महज 22 वर्ष की आयु में श्री जिंदल ने देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार दिलाने का संकल्प लिया। करीब एक दशक तक चले उनके कानूनी संघर्ष के बाद 23 जनवरी 2004 को सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकों के ध्वजारोहण के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों भारतीय जिस गर्व और सम्मान के साथ तिरंगा फहराते हैं, उसमें श्री नवीन जिंदल के इस ऐतिहासिक प्रयास की महत्वपूर्ण भूमिका है।

‘काम ही पूजा’ के मंत्र से राष्ट्र निर्माण का संकल्प

Jindal Steel News (credit-sm)

श्री शाह ने संस्थापक चेयरमैन स्वर्गीय बाउजी श्री ओ.पी. जिंदल के मूल मंत्र “काम ही पूजा है और देश की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है” को दोहराते हुए कहा कि इन्हीं आदर्शों के साथ जिंदल स्टील आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी ताकत उसकी मशीनरी या तकनीक नहीं, बल्कि उसके समर्पित कर्मचारी और उनके परिवार होते हैं। समारोह के अंत में सभी ने बाउजी के सपनों को साकार करने, तिरंगे की गरिमा बनाए रखने और संस्थान के साथ राष्ट्र को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सामूहिक संकल्प लिया।

Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।