Trump on Peace Talks Fail : दुनिया इस समय युद्ध और शांति के बीच झूल रही है, तमाम उम्मीदों को चकनाचूर कर, इस्लामाबाद में चल रही हाई प्रोफ़ाइल शांति वार्ता आखिरखार विफल रही। यानि दोनों ईरान अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में जो शांति की गुंजाइश चल रही थी वह फिलहाल खत्म हो गई है। अब दूसरी वार्ता से पहले फिर दुनिया एक युद्ध की दहलीज पर आकर खड़ी हो गई है।
दोनों देशों के रवैय से फिलहाल यह कहना मुमकिन नहीं कि युद्ध की आ में आखिर कब तक दुनिया को झुलसना पड़ेगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी दी है.
ट्रम्प की चेतावनी
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर साफ कर दिया है कि अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिका उसकी ‘समुद्री घेराबंदी’ करने से पीछे नहीं हटेगा, जिससे ईरान के तेल राजस्व पर भारी असर पड़ेगा. ट्रम्प ने अपने पोस्ट में एक आर्टिकल शेयर किया है।
ट्रंप ने पहले भी कहा था कि अगर समझौता नहीं हुआ तो स्ट्राइक्स फिर शुरू होंगे और वॉरशिप्स को बेहतरीन हथियारों से लैस किया जा रहा है. उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि उसके पास होर्मुज के जरिए शॉर्ट टर्म इक्स्टॉर्शन के अलावा कोई कार्ड नहीं बचा है.
समुद्री घेराबंदी क्या है?
ट्रम्प का समुद्री घेराबंदी इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर अमेरिका ईरान की समुद्री घेराबंदी करता है, तो इसका सीधा असर ईरान के तेल व्यापार और आयात-निर्यात पर पड़ेगा. इसका मतलब होगा कि अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को रोक सकती है. यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने वाला कदम माना जाता है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि शांति की कोशिशें अब खत्म हो चुकी हैं और अब ‘एक्शन’ का समय है.
इस्लामाबाद में हुई इस शांति वार्ता पर दुनिया भर की नजरें टिकी थीं, तमाम देश इस युद्ध के खत्म होने के इंतजार में हैं क्योंकि युद्ध के चलते दुनिया में एक अस्थिरता का वातावरण छा गया है। अब चूंकि फिर से युद्ध शुरू होगा तो इसकी लपटें पहले से ज्यादा खतरनाक होने की संभावनाएं हैं, जिसका खामियाजा सबसे पहले खाड़ी देशों को भुगतना पड़ सकता है फिर पूरी दुनिया को। क्योंकि युद्ध लंबा चलता है तो खड़ी देशों से निर्यात होने वाला ईंधन सबसे ज्यादा प्रभावित होगा जिसका असर दुनिया पर पड़ने जा रहा है।
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