बिस्तर, बाथरूम और फ्लश में हरी- हरी नोटों की गड्डी! UP के इस रिटायर्ड अफसर के घर पर निकला 100 करोड़ का खजाना

Vigilance Raid UP

Vigilance Raid UP: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से हैरान कर देना वाला मामला सामने आया है। दरअसल कानपुर विजिलेंस यूनिट ने वाणिज्य कर विभाग के रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विजिलेंस विभाग ने लंबे समय तक जांच करने के बाद यह कार्रवाई की है। अगस्त 2023 से चल रही जांच में केशव लाल की कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई। जब यह स्पष्ट हुआ कि उनकी संपत्ति उनकी ज्ञात आय से मेल नहीं खाती, तब शासन से अनुमति लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

Vigilance Raid UP: 2017 की रेड में हुआ था बड़ा खुलासा

Vigilance Raid UP
Vigilance Raid UP (Source: Social Media)

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2017 में हुई थी, जब आयकर विभाग ने नोएडा स्थित उनके सेक्टर-34 वाले घर पर छापा मारा था। इस छापेमारी में करीब 10 करोड़ रुपये नकद और लगभग 3 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए थे। उस समय भी वह इन पैसों का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दे सके थे।

अजीब जगहों पर छिपाए गए थे नोट

रेड के दौरान जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह थी नोट छिपाने के तरीके। घर के पूजा स्थान, अलमारियों और बिस्तर के गद्दों के अलावा बाथरूम के फ्लश में भी नोटों की गड्डियां छिपाकर रखी गई थीं। इससे यह साफ हुआ कि पैसे को छिपाने के लिए हर संभव तरीका अपनाया गया था।

Vigilance Raid UP: कई शहरों में फैली संपत्ति

विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया कि केशव लाल ने उत्तर प्रदेश के कई शहरों में संपत्ति बनाई। उनके पास लखनऊ में दो बड़े मकान हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में भी महंगे प्लॉट और घर मौजूद हैं। चंदौली में भी उनकी संपत्ति होने की जानकारी मिली है। इन सभी संपत्तियों को जांच एजेंसियों ने संदिग्ध मानते हुए भ्रष्टाचार से अर्जित माना है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, केशव लाल की पूरी सेवा अवधि में उनकी कुल वैध आय लगभग 1.34 करोड़ रुपये थी। इसके विपरीत, उनके द्वारा किया गया खर्च और निवेश 18.27 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया। यानी उन्होंने अपनी आय से करीब 17.26 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए। यह अंतर ही उनके खिलाफ कार्रवाई का मुख्य आधार बना।

पहले ही हो चुकी थी जबरन रिटायरमेंट

सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केशव लाल को साल 2017 में ही समय से पहले रिटायर कर दिया था। अब विजिलेंस जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी पदों पर बैठे कुछ अधिकारी किस तरह अपनी जिम्मेदारियों का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति जुटाते हैं।

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