12 Jyotirlinga Names: भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोग Bhagwan Shiv को देवों के देव महादेव का रूप मानते हैं। भगवान शिव को शंकर, भोलेनाथ, नीलकंठ और महेश्वर समेत कई अन्य नामों से जाना जाता है। भगवान शिव को सृजन, पालन और संहार के चक्र का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शंकर की आराधना से रोग, कष्ट, दरिद्रता और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। तथा जीवन में सुख-शांति आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव इस ब्रह्मांड के कण-कण में विराजमान हैं, लेकिन पृथ्वी पर 12 ऐसे स्थान हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि भोलेनाथ स्वयं इन स्थानों पर ज्योति के रूप में प्रकट हुए थे।
इन्हें ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग’ कहा जाता है। माना जाता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक इन ज्योतिर्लिंगों के नाम का स्मरण या दर्शन करता है, उसे अपार पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं, भगवान शिव के वो 12 Jyotirlinga Names कौन-कौन से और कहां स्थित हैं।
12 Jyotirlinga Names: जानिए भगवान शिव 12 ज्योतिर्लिंग कौन से हैं?

1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
Somnath Jyotirlinga Gujarat के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन में स्थित है। इसे पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियां थीं, जिनका विवाह चंद्रदेव से हुआ था। चंद्रदेव अपनी सभी पत्नियों में से रोहिणी को सबसे अधिक प्रेम करते थे और अन्य पत्नियों की उपेक्षा करते थे। इससे नाराज़ होकर दक्ष प्रजापति ने उन्हें श्राप दे दिया।
बाद में श्राप से मुक्ति के लिए चंद्रमा ने प्रभास क्षेत्र (सोमनाथ) में भगवान शिव की तपस्या की जिसके बाद तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी प्रकट हुए और चंद्रमा को श्राप से मुक्त कर अपने मस्तक पर धारण कर लिया। चंद्रमा का एक नाम ‘सोम’ भी है, इसलिए भगवान शिव यहां ‘सोमनाथ’, अर्थात सोम के स्वामी, के नाम से प्रसिद्ध हुए।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले (पूर्व में कुरनूल) में श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है। ‘मल्लिका’ का अर्थ पार्वती और ‘अर्जुन’ का अर्थ शिव है। एक बार भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय नाराज़ होकर श्रीशैल पर्वत चले गए। माता पार्वती और शिवजी उन्हें मनाने वहां पहुंचे। जब कार्तिकेय ने उन्हें आते देखा, तो वे और दूर चले गए। अपने पुत्र के प्रेम में शिव-पार्वती वहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए।
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां की भस्म आरती विश्व-प्रसिद्ध है। Mahakaleshwar Jyotirlinga Ujjain के मध्य प्रदेश राज्य के ऐतिहासिक शहर में स्थित है। प्राचीन काल में अवंतिका (उज्जैन) में ‘दूषण’ नामक राक्षस भक्तों को सताता था। तब भगवान शिव भक्तों की रक्षा के लिए महाकाल के रूप में प्रकट हुए थे। उन्होंने अपनी हुंकार से राक्षस का वध कर दिया। भक्तों के अनुरोध पर शिवजी लोक कल्याण के लिए वहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए।
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के एक पवित्र द्वीप पर स्थित है। माना जाता है कि नर्मदा नदी के “ॐ” आकार में बहने के कारण यह स्थान ओंकारेश्वर कहलाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, विंध्य पर्वत ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शिव प्रकट हुए और विंध्य पर्वत को वरदान दिया। उसी स्थान पर शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए। यह स्थान भक्ति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

5. केदारनाथ
Kedarnath Jyotirlinga Uttarakhand के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है। पांडवों ने कुरुक्षेत्र युद्ध के पापों से मुक्ति के लिए यहां भगवान शिव की तपस्या की थी। शिव ने बैल का रूप धारण किया और भूमि में समा गए। भीम ने उनका पीछे का कूबड़ भाग पकड़ लिया। उसी स्थान पर शिव केदारनाथ के रूप में प्रकट हुए।
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में ‘भीम’ नाम का एक राक्षस था। उसके अत्याचारों से देवता और मनुष्य सभी परेशान थे। तब भगवान शिव ने भीम का वध कर दिया। भक्तों ने उनसे यहां वास करने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां स्थापित हो गए।
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
Kashi Vishwanath Jyotirlinga Varanasi उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) शहर में, पवित्र नदी गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित है। यह भगवान शिव की सबसे प्रिय नगरी है। माना जाता है कि यह स्थान शिव के त्रिशूल पर स्थित है और प्रलय काल में भी नष्ट नहीं होता है। कहा जाता है कि यहां मृत्यु प्राप्त करने वाला व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है। शिव स्वयं यहां विश्वनाथ के रूप में निवास करते हैं। यह स्थान सृष्टि के प्रारंभ से ही अविनाशी माना गया है।
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। गौतम ऋषि और गंगा (गोदावरी) के विशेष आग्रह पर भगवान शिव यहां विराजमान हैं। यहां एक ही लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश – तीनों के प्रतीक विद्यमान हैं।

9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (बाबा धाम) भारत के झारखंड राज्य के देवघर जिले में स्थित है। माना जाता है कि रावण भगवान शिव को लंका ले जाना चाहता था। शिव ने शर्त रखी कि लिंग को मार्ग में कहीं भी न रखा जाए। देवताओं की लीला से रावण यहां लिंग रख देता है, जो यहीं स्थापित हो जाता है। भगवान शिव यहां वैद्यनाथ के नाम से प्रसिद्ध हैं।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में द्वारका शहर और बेत द्वारका द्वीप के बीच स्थित एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। पौराणिक कथा के अनुसार, दारुक नामक राक्षस भक्तों को सताता था। शिव भक्त सुप्रिय की रक्षा के लिए भगवान शिव यहां नागेश्वर रूप में प्रकट हुए और दारुक का वध किया। यह ज्योतिर्लिंग भक्तों को भय और विष से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग, जिसे रामनाथस्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है। Rameshwaram Jyotirlinga Tamil Nadu के रामनाथपुरम जिले में एक द्वीप पर स्थित है। लंका विजय से पहले भगवान राम ने शिव पूजा के लिए यहां शिवलिंग की स्थापना की। माता सीता ने बालू से शिवलिंग बनाया था। रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए शिव ने राम को आशीर्वाद दिया। तभी से यह ज्योतिर्लिंग रामेश्वर कहलाता है।
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में एलोरा (वेरुल) के पास स्थित है। यह कथा भक्त घृष्णा से जुड़ी है, जो प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करती थी। ईर्ष्यावश उनकी बहनों ने उनके पुत्र की हत्या कर दी। घृष्णा की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनके पुत्र को जीवित किया और यहां ज्योतिर्लिंग रूप में स्थापित हो गए।
Also Read: Kashi Manikarnika Ghat: काशी का वो घाट जहां 24 घंटे जलती है चिता, सच जानकर रह जाएंगे हैरान


Download Android App
Download iOS App




