केंद्र सरकार कथित पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करेगी। इलेक्ट्रोनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जरिए केंद्र सरकर की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर हलफनामे में यह जानकारी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए अपने दो पेज के हलफनामे में केंद्र ने याचिकाकर्ताओं द्वारा सरकार के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया है कि पत्रकारों, राजनेताओं, कर्मचारियों पर जासूसी करने के लिए स्पाइवेयर था।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है, ‘‘हमारी ओर से कोई जासूसी या अवैध निगरानी नहीं की गई है।’’ केंद्र ने याचिकाकर्ताओं के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हलफनामे में सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार एन राम और अन्य याचिकाकर्ताओं के लगाए सारे इल्जाम सिरे से नकार दिए हैं। उनकी याचिका में आरोप थे कि सैनिक प्रयोग के इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सरकार ने पत्रकारों, राजनेताओं, एक्टिविस्ट, नौकरशाहों और न्यायपालिका से जुड़े लोगों की जासूसी के लिए किया।
इससे पहले 10 अगस्त को मसले पर सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने स्वतंत्र जांच का अनुरोध करने वाले कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया पर ‘समानांतर कार्यवाही और बहस’ पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि अनुशासन और न्याय प्रणाली में विश्वास होना चाहिए। इस बार पूरा का पूरा मॉनसून सत्र पेगासस जासूसी मसले पर विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया। संसद में कुछ अहम बिल पास तो हुए लेकिन किसी पर भी चर्चा नहीं हो पाई। विपक्ष के नेताओं की मांग थी कि सबसे पहले पेगासस पर चर्चा होनी चाहिए।


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