पेगासस मुद्दे पर बोली केंद्र सरकार, कहा-सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा करेंगे सहयोग

सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि पेगासस साफ्टवेयर का इस्तेमाल करके जासूसी के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति के साथ सरकार पूरा सहयोग करेगी।

सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि पेगासस साफ्टवेयर का इस्तेमाल करके जासूसी के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञों की समिति के साथ सरकार पूरा सहयोग करेगी। एक मीडिया हाउस के सम्मेलन को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि सरकार समिति को अपनी जांच पूरी करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा, मानव संसाधन, प्रयोगशाला की सुविधा और जानकारियां उपलब्ध कराएगी।
वैष्णव ने कहा, ‘इस मामले में हम बिल्कुल साफ हैं, इसलिए हमें इस बात की चिंता नहीं करनी है कि इस रिपोर्ट में क्या आने जा रहा है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार की किसी एजेंसी ने कभी भी पेगासस की खरीद नहीं की, वैष्णव ने कहा, ‘मैंने संसद में बिल्कुल स्पष्ट कहा था कि हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वह कानून के दायरे में है और कानून सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित दिशानिर्देशों के मुताबिक है।’ याद दिला दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की थी।
तकनीक के दुरुपयोग ने विचारधारा का बड़ा दवाब डाला
इंटरनेट मीडिया के नियमन पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मो ने लोगों को स्वयं को खुलकर अभिव्यक्त करने का मौका दिया है, साथ ही तकनीक के दुरुपयोग ने विचारधारा का बड़ा दवाब भी डाला है कि नियमन कहां होना चाहिए। वैष्णव ने जोर देकर कहा कि निजता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच एक संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैं कहूंगा कि हमारी नीति में हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव होगा और हमारी जरूरतों व वास्तविकताएं केंद्र में होंगी।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंटरनेट मीडिया में विश्वास का तत्व आना चाहिए। सरकार की मंशा सेंसर करने की नहीं, बल्कि इंटरनेट मीडिया यूजर्स को सशक्त बनाते हुए स्व-नियमन के लिए सक्षम बनाने की है।
नए आइटी इंटरमीडियरी नियम लागू
उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले स्व-नियमन का तत्व होना चाहिए। स्व-नियमन पहला कदम है, दूसरा है कि यूजर्स खुद आगे आएं और नियमन करें। तीसरा है कि सरकार दखल दे। इसलिए हमने अपने इंटरनेट मीडिया और इंटरमीडियरी नियमों को इस तरह बनाया है जो बुनियादी तौर पर उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हैं।’ बता दें कि भारत ने इस साल की शुरुआत में नए आइटी इंटरमीडियरी नियमों को लागू किया है जिनका मकसद ट्विटर और फेसबुक समेत बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए ज्यादा जवाबदेही तय करना है।
मासिक अनुपालन रिपोर्ट भी प्रकाशित करना अनिवार्य
नियमों के तहत इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मो को अधिकारियों द्वारा इंगित सामग्री को 36 घंटे के भीतर हटाना और देश में तैनात अधिकारी समेत मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना करना आवश्यक है। इंटरनेट मीडिया कंपनियों के लिए शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर नग्नता प्रदर्शित करने वाले या स्वरूप बदले गए फोटो की पोस्ट हटाना जरूरी है। 50 लाख से अधिक यूजर्स वाली बड़ी इंटरनेट मीडिया कंपनियों को मासिक अनुपालन रिपोर्ट भी प्रकाशित करना अनिवार्य है जिसमें प्राप्त शिकायतों, उन पर कार्रवाई और हटाई गई सामग्रियों का विवरण हो।

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