कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सोमवार को राफेल सौदे को लेकर जेपीसी जांच के खिलाफ वित्त मंत्री अरूण जेटली की दलील को खारिज करते हुए कहा कि सरकार और संसद अतीत में उच्चतम न्यायालय के फैसलों को पलट चुकी है। हाल में, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम को लेकर भी यही किया गया है।
चिदंबरम का जवाब जेटली की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें वित्त मंत्री ने राफेल सौदे की जांच के खिलाफ शीर्ष अदालत के फैसले के बाद इस मामले को संसदीय समिति को भेजने से इनकार करते हुए कहा था कि राजनीतिक निकाय उच्चतम न्यायालय के फैसले की समीक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा है।
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चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा, ‘‘ वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘क्या सियासतदानों की समिति उन मुद्दों की समीक्षा करने के लिए उपयुक्त है जिनपर उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया है? जब सरकार/संसद ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलटने के लिए अत्याचार रोकथाम अधिनियम में संशोधन किया था, क्या यह उच्चतम न्यायालय के फैसले की राजनीतिज्ञों द्वारा समीक्षा नहीं है?’’
चिदंबरम ने यह भी कहा कि राफेल सौदे के विभिन्न पहलुओं पर उच्चतम न्यायालय ने फैसला नहीं दिया है। उन्होंने पूछा, ‘‘उन मुद्दों का परीक्षण कौन करेगा? या उनका परीक्षण नहीं किया जाएगा?’’
कांग्रेस राफेल लड़ाकू विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है और संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग कर रही है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा था कि उच्चतम न्यायालय की क्लीन चिट के बाद सौदे पर सीएजी का नजरिया प्रासंगिक नहीं है।


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