कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि टीकाकरण के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की ओर से दिए आदेश से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की नीतियां बेतुकी हैं। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले से टीकाकरण को लेकर कांग्रेस एवं उसके नेतृत्व के रुख की पुष्टि हुई है।
उन्होंने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के आदेश ने साबित कर दिया है कि कोरोना पर सरकार की नीतियां बेतुकी, बेमेल, और बेकार हैं। कांग्रेस पार्टी शुरू से कहती आ रही है कि कोरोना पर सरकार की नीतियां असंगत और अनुपयोगी हैं। हमारे इस रुख की कानूनी रूप से पुष्टि हुई है।’’
वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘‘अगर संक्षिप्त में कहा जाए तो ये उच्चतम न्यायालय का आदेश तीन-चार मुद्दों पर केंद्रित है। एक है टीके की कमी, दूसरा है कि टीकों के दाम में एकरूपता नहीं है, तीसरा यह कि कीमतें अलग अलग क्यो हैं और चौथा यह कि टीके के वितरण में विसंगति है। सिंघवी ने सवाल किया, ‘‘100 प्रतिशत टीकाकरण कब और कैसे होगा? आखिर यह कैसे साबित होगा कि 100 प्रतिशत टीकाकरण एक जुमला या नारा नहीं है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार से हम यही कहना चाहते हैं कि आप पहेलियां तो बुझा सकते हैं, आप हमारा मजाक तो उड़ा सकते हैं, लेकिन किसी और बहाने से ही सही कम से कम जो हमने प्रस्ताव रखे थे, उनके ऊपर अमल तो करिए, कदम उठाइए।’’कांग्रेस नेता ने कहा कि लोगों को वित्तीय मदद देने और टीकाकरण को लेकर कांग्रेस नेतृत्व ने जो सुझाव दिए थे, उन सरकार को अमल करना चाहिए।
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र से कहा कि कोविड-19 रोधी टीकाकरण नीति से जुड़ी अपनी सोच को दर्शाने वाले सभी प्रासंगिक दस्तावेज और फाइल पर की गयी टिप्पणियां रिकॉर्ड पर रखे तथा कोवैक्सीन, कोविशील्ड एवं स्पूतनिक वी समेत सभी टीकों की आज तक की खरीद का ब्योरा पेश करे।
शीर्ष अदालत ने म्यूकरमायकोसिस (ब्लैक फंगस) की दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताने को कहा है। इसके अलावा निशुल्क टीकाकरण के संबंध में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से दो सप्ताह के भीतर अपना रुख बताने को कहा गया है।


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