Manipur school closed : मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुआ सामुदायिक संघर्ष ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हाल में यह संघर्ष फिर से तनाव पैदा करने लगा है। खासकर पहाड़ी जिलों में कुकी और नगा समुदायों के बीच एक बार फिर तनाव गहरा गया है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।
बता दें, उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग, चूराचांदपुर और कांगपोकपी जैसे संवेदनशील इलाकों में पिछले 7 दिनों से स्कूल, कॉलेज और बाजार पूरी तरह बंद पड़े हैं। प्रमुख राजमार्गों पर जगह-जगह नाकेबंदी और चेक पॉइंट बना दिए गए हैं, जिससे आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई ठप हो गई है। कांगपोकपी के दूरदराज गांवों में चीनी 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक के रिकॉर्ड दामों पर बिक रही है। डर का आलम यह है कि लोग खेतों में काम करने या मेडिकल इमरजेंसी के लिए भी घरों से बाहर निकलने में घबरा रहे हैं।
6 घंटे तक आमने-सामने डटे रहे जवान
ताजा हिंसा की सबसे बड़ी घटना कांगपोकपी जिले के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव से सामने आई है। मंगलवार रात करीब 10:30 बजे अत्याधुनिक हथियारों से लैस हमलावरों ने चावांगकिनिंग नगा गांव पर हमला बोल दिया। मौके पर मौजूद सीआरपीएफ के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की। लगभग 6 घंटे तक दोनों ओर से रुक-रुक कर भीषण गोलीबारी होती रही, जो बुधवार सुबह 4:30 बजे जाकर थमी।
सीआरपीएफ की तत्परता से हमलावर गांव में नहीं घुस सके, लेकिन गांव के बाहरी हिस्से में बने दो लकड़ी के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। इसके अलावा कई मकानों की दीवारों पर गोलियों के गहरे निशान मिले हैं।
40 मौतों का दावा
दूसरी तरफ, तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद कई फार्महाउसों में आगजनी की खबर आई। कुकी संगठनों ने बीते 4 दिनों में 4 महिलाओं समेत अपने 6 लोगों की हत्या का आरोप नगा गुटों (NSCN-IM और ZUF-K) पर लगाया है। हालांकि, इन दावों की किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
2023 से अशांत है मणिपुर
मणिपुर में 3 मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा चल रही थी। लेकिन इस साल फरवरी में उखरुल के लिटन गांव से कुकी और नगा समुदायों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया। स्थानीय नागरिक संगठनों के मुताबिक, इस नए संघर्ष में फरवरी से लेकर अब तक 40 लोगों की जान जा चुकी है।
हालिया हालात यह हैं कि बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट के निजी गाड़ियां सड़कों पर नहीं निकल पा रही हैं। हवाई अड्डे जाने या आपातकालीन इलाज के लिए भी कई जगहों पर स्थानीय सब-डिशनल ऑफिसर से विशेष अनुमति लेनी पड़ रही है।


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