हंगामे के बाद स्थगित हुई राज्यसभा, विपक्षी दलों ने पेगासस और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की बनाई रणनीति

Summary :

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने पेगासस जासूसी मामला, किसान आंदोलन और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर संसद के मौजूदा मानसून सत्र में आगे सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की।

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने पेगासस जासूसी मामला, किसान आंदोलन और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर संसद के मौजूदा मानसून सत्र में आगे सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की। बता दें कि राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच बना गतिरोध शुक्रवार को भी नहीं दूर हो सका और विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण उच्च सदन की बैठक सुबह शुरू होने के करीब 10 मिनट बाद ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
सुबह सदन की बैठक शुरू होते ही सभापति एम वेंकैया नायडू ने हंगामा करने वाले सदस्यों के आचरण पर आपत्ति जतायी और कहा कि सदन में सीटी बजाना शोभनीय नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे आचरण से सदन की गरिमा प्रभावित होती है।
इसके बाद कांग्रेस सदस्य केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने अपने एक सवाल के जवाब को लेकर स्वास्थ्य राज्य मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय के जवाब में कहा गया था कि देश में कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण कोई मौत नहीं हुयी। 
इस पर सभापति ने कहा कि उनके नोटिस के संबंध में प्रक्रिया जारी है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि पिछले पांच साल से नियम 267 के तहत कोई नोटिस स्वीकार नहीं किया गया है। इस पर सभापति नायडू ने कहा कि नियम 267 के तहत नोटिस स्वीकार करने पर सदन का पूर्वनिर्धारित कामकाज स्थगित करना होता है और इसका विरले ही उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि आजकल उन्हें नोटिस 267 के तहत रोजाना कई नोटिस मिलते हैं।
इसी दौरान सदन में विभिन्न विपक्षी दलों का हंगामा शुरू हो गया और सभापति ने 11 बजकर करीब 10 मिनट पर बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। पेगासस जासूसी विवाद, नए कृषि कानून, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि जैसे विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी सदस्यों का हंगामा मौजूदा मानसून सत्र की शुरूआत से ही जारी है। मौजूदा मानसून सत्र में अब तक राज्यसभा में शून्यकाल नहीं हो पाया है। बताते चलें कि विपक्ष के हंगामे के चलते राज्यसभा को में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में कांग्रेस और समान विचार वाले राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक भी हुई। बैठक में विभिन्न दलों के दोनों सदनों के नेता और सांसद मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पेगासस जासूसी मामला, किसान आंदोलन और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में खड़गे के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और आनंद शर्मा, द्रमुक के टी आर बालू एवं तिरुची शिवा, शिवसेना के संजय राउत, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चव्हाण, नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी और कई अन्य राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।
पेगासस और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर पिछले कई दिनों से संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है। 19 जुलाई से मॉनसून सत्र आरंभ हुआ था, लेकिन अब तक दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि पेगासस जासूसी मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए सरकार के तैयार होने के बाद ही संसद में गतिरोध खत्म होगा।

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