सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोविशील्ड और कोवैक्सिन के माध्यम से सामूहिक टीकाकरण के खिलाफ एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि लोगों को कोविड-19 से बचाने के लिए टीकाकरण महत्वपूर्ण है। इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और बी.वी. नागरत्ना ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, “हम नहीं चाहते कि इस मामले पर बिल्कुल भी बहस हो। आइए हम टीकाकरण पर संदेह न करें।”
याचिकाकर्ता मैथ्यू थॉमस की ओर से पेश वकील ने पीठ से इस मामले में उनकी दलीलों को विस्तार से सुनने का आग्रह किया। हालांकि, पीठ ने जवाब दिया कि वह याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि उसे इस मामले में उच्च न्यायालय के फैसले में कोई त्रुटि नहीं दिखती और वह याचिका पर विचार नहीं करेगी।
शीर्ष अदालत कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने कोविशील्ड और कोवैक्सिन के सामूहिक टीकाकरण को रोकने के निर्देश देने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करने के लिए याचिकाकर्ताओंपर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
इस साल मई में, उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि यह जनहित में दायर नहीं किया गया था और यह अनुकरणीय लागत लगाने के लिए एक उपयुक्त मामला था क्योंकि इसमें 45 मिनट की खपत होती है, जो कोविड-19 से बाहर उत्पन्न होने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के लिए समर्पित हो सकती थी। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि यह स्पष्ट नहीं है कि किस कानून के तहत केंद्र ने बिना क्लीनिकल ट्रायल के टीकाकरण की अनुमति दी है।


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