भारत में हर साल की तरह आज का दिन (15 सिंतबर) अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे) के रूप में मनाया जा रहा है। आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंक आज भारत के महान अभियन्ता एवं देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से विभूषित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या का जन्मदिन है।
उन्होंने ही आधुनिक भारत की रचना कर देश को एक नया रुप दिया है, जिसे शायद ही कोई भुला पाएं। ये दिन देश के इंजीनियरों के प्रति सम्मान और उनके कार्य की सराहना के लिए मनाया जाता है। 15 सितंबर यानी इंजीनियर डे उन लोगों को समर्पित है, जिन लोगों ने तकनीक के जरिए विकास को गति दी है।
PM मोदी ने दी इंजीनियर्स दिवस की बधाई
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इंजीनियर्स दिवस (अभियंता दिवस) पर सभी अभियंताओं को बधाई दी और कहा कि धरती को बेहतर बनाने और प्रौद्योगिकी के मामले में देश को आधुनिक बनाने में उनके योगदान का धन्यवाद करने के लिए शब्द नहीं हैं।
Greetings on #EngineersDay to all hardworking engineers. No words are enough to thank them for their pivotal role in making our planet better and technologically advanced. I pay homage to the remarkable Shri M. Visvesvaraya on his birth anniversary and recall his accomplishments.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 15, 2021
प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘इंजीनियर्स दिवस पर सभी परिश्रमी इंजीनियरों को बधाई। हमारे ग्रह को बेहतर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें धन्यवाद देने के लिए कोई शब्द पर्याप्त नहीं हैं। मैं एम. विश्वेश्वरय्या को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनकी उपलब्धियों को याद करता हूं।’’
कौन थे एम. विश्वेश्वरय्या ?
वर्ष 1860 में जन्मे इस महान अभियंता ने बेहद कम संसाधनों के बावजूद दक्षिण भारत में बांध निर्माण से लेकर सिंचाई तथा जलापूर्ति के क्षेत्र में बड़े-बड़े काम किए। विश्वेश्वरैया ने मैसूर के कृष्ण राजसागर बांध का निर्माण कराया, जिससे मैसूर और मंड्या जिलों का काया पलट हो गया।
वाडियार वंश के शासनकाल में कावेरी नदी पर इस बांध के निर्माण के दौरान देश में सीमेंट नहीं बनता था। इसके लिए इंजीनियरों ने मोर्टार तैयार किया जो सीमेंट से ज्यादा मजबूत था। इस बांध का निर्माण सर एमवी के नाम से प्रसिद्ध विश्वेश्वरैया के जीवन की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। विश्वेश्वरैया को 1912 में मैसूर के महाराजा ने अपना दीवान यानी मुख्यमंत्री नियुक्त किया। उनका निधन 1962 में हुआ।


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