कोरोना की संभावित तीसरी संभावित लहर को लेकर केंद्र ने कहा – सभी राज्य टीकाकरण की गति तेज करें

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कोरोना की दूसरी लहर को काबू करने के लिए देशभर मे लॉकडाउन लगाया गया जिसके बाद संक्रमण को काबू में किया गया। लॉकडाउन का असर दिखने लगा और कोरोना वायरस के मामलों में गिरावट हुई।

कोरोना की दूसरी लहर को काबू करने के लिए देशभर मे लॉकडाउन लगाया गया जिसके बाद संक्रमण को काबू में किया गया। लॉकडाउन का असर दिखने लगा और कोरोना वायरस के मामलों में गिरावट हुई। इसके बाद देशभर में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच शनिवार को केंद्र सरकार ने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से अपील की है कि वह टीकाकरण अभियान को तेज करें और कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन हटाते समय कोविड अनुकूल व्यवहार, जांच-निगरानी-इलाज, टीकाकरण जैसी ‘अति महत्वपूर्ण’ पांच रणनीतियां अपनाएं। वहीं एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि अगर कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया तो भारत में छह से आठ सप्ताह में तीसरी लहर आ सकती है।
सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे संदेश में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि संक्रमण के प्रसार की कड़ी को तोड़ने के लिए मौजूदा परिदृश्य में कोविड-19 रोधी टीकाकरण बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य और केंद्र शासित प्रदेश टीकाकरण की गति तेज करें।
गृह सचिव ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और कइयों ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए। उन्होंने कहा, ‘‘ संक्रमण के मामलों में कमी को देखते हुए कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने प्रतिबंधों में राहत देना शुरू किया है, ऐसे में मैं यह रेखांकित करना चाहूंगा कि लॉकडाउन हटाने की प्रक्रिया सावधानीपूर्वक व्यवस्थित और जमीनी स्थिति के आकलन के आधार पर हो।’’
गृह सचिव ने कहा कि संक्रमण से निपटने के लिए कोविड अनुकूल व्यवहार की नियमित निगरानी की जरूरत है ताकि खामियों से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि इस व्यवहार में मास्क का इस्तेमाल, हाथ धोना, सामाजिक दूरी बनाये रखना और बंद स्थलों का हवादार होना सुनिश्चित करना शामिल है।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ राज्यों में प्रतिबंधों में राहत से बाजार में भीड़ एकत्र हो गई और कोविड-19 से बचाव संबंधी नियमों का पालन नहीं किया गया।’’ उन्होंने कहा कि संक्रमण के प्रसार पर सतत आधार पर नियंत्रित करने के लिए यह आवश्यक है कि जांच-निगरानी-इलाज जैसी रणनीति का सहारा लिया जाए और खासतौर पर यह सुनिश्चित हो कि जांच दर में कमी न होने पाए।
इस बीच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को चेतावनी दी कि यदि कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया तो अगले छह से आठ सप्ताह में वायरल संक्रमण की अगली लहर देश में दस्तक दे सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक बड़ी संख्या में आबादी का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोविड-उपयुक्त व्यवहार का आक्रामक तरीके से पालन करने की आवश्यकता है।
इससे पहले, भारत के महामारी विज्ञानियों ने संकेत दिया था कि कोविड-19 की तीसरी लहर अपरिहार्य है और इसके सितंबर-अक्टूबर से शुरू होने की आशंका है। भल्ला ने कहा कि चूंकि महामारी की स्थिति में बदलाव होता रहता है, ऐसे में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में वृद्धि या फिर संक्रमण दर में वृद्धि की शुरुआती संकेत पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लघु स्तर पर एक ऐसा तंत्र बनाने की जरूरत है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जब कभी भी छोटे स्थलों पर मामले बढ़ने शुरू हो, उससे वहीं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दिशानिर्देशों के अनुसार स्थानीय नियंत्रण कदमों के जरिए निपटा जाए।

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