कभी आंध्र प्रदेश में एक स्तूप का हिस्सा रही प्राचीन मूर्ति 1990 के दशक में भारत के एक संग्रहालय से चोरी हो गई थी जिसे अब यूरोप में खोजे जाने के बाद वापस लौटाया जाएगा। चोरी और लूटी गई ऐतिहासिक कलाकृतियों के प्रत्यावर्तन पर काम करने वाले आर्ट रिकवरी इंटरनेशनल (एआरआई) ने कहा कि उसने पिछले हफ्ते ब्रसेल्स में भारतीय उच्चायोग में राजदूत संतोष झा को तीसरी शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्ध की मूर्ति सौंपी।
मूर्ति को बिना शर्त देने के लिए तैयार हुआ ब्रिटेन
इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट (आईपीपी) द्वारा इसके इतिहास के बारे में सतर्क किए जाने के बाद संगठन भारत सरकार को मूर्ति बिना शर्त देने के लिए बातचीत करने को तैयार हुआ। वकील और एआरआई के संस्थापक क्रिस्टोफर ए मारीनेल्लो ने कहा, “चोरी और लूटी गई कला की समस्या केवल चोरी के शिकार व्यक्ति तक ही सीमित नहीं है। अवैध वस्तुओं के मालिक तेजी से इस बात पर संज्ञान ले रहे हैं कि वे संभावित जब्ती, कानूनी कार्यवाही और प्रतिष्ठा के नुकसान का सामना किए बिना चोरी की कलाकृतियों को आसानी से बेच, प्रदर्शित या परिवहन नहीं कर सकते हैं।”


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