सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चुनाव आयुक्त के रूप में अरुण गोयल की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एनजीओ ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की जनहित याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान पीठ ने गोयल की नियुक्ति पर फाइल का अध्ययन किया था, लेकिन उनकी नियुक्ति को रद्द करने से परहेज किया और अब इस मुद्दे की दोबारा जांच नहीं की जा सकती है।
एनजीओ के वकील ने कोर्ट के सामने क्या रखी दलीले
हमने पाया कि संविधान पीठ ने नियुक्ति पर कोई आदेश पारित नहीं किया। हम नोटिस जारी करने के इच्छुक नहीं हैं, तदनुसार, मामला खारिज किया जाता है, ”पीठ ने कहा। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संविधान पीठ नियुक्ति को रद्द कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। एनजीओ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि नियुक्ति मनमाने ढंग से की गई और पूरी प्रक्रिया दुर्भावनापूर्ण थी।
कोर्ट ने अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अपनायी गयी चयन प्रक्रिया संदिग्ध है, याचिका में कहा गया कि 160 अधिकारी 1985 बैच के थे और उनमें से कुछ गोयल से छोटे थे। हालाँकि, इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि अधिकारी गोयल से उम्र में छोटे क्यों थे और चुनाव आयोग चुनाव आयुक्तों की सेवा की शर्तें और व्यवसाय का संचालन अधिनियम, 1991 की धारा 4 के अनुसार उनका पूरा कार्यकाल छह साल का होगा। इसमें कहा गया है कि पैनल में शामिल नहीं होने पर सरकार ने गोयल को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया।


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