Where is Prashant Kumar? : बिहार चुनाव में एनडीए गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और नीतीश कुमार ने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. इस जीत का श्रेय नीतीश कुमार को गया क्योंकि उन्होंने 75 साल की उम्र में जिस तत्परता से चुनाव में अपनी सक्रियता दिखाई वह हैरान करने वाली थी।
विपक्ष लगातार नीतीश के स्वास्थ्य का मुद्दा बनाता रहा मगर नीतीश कुमार ने चुनाव दर चुनाव रैली कर यह बता दिया कि वे इस राजनीति के सबसे पके खिलाड़ी हैं।
हालांकि बीते लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति की धुरी बने हुए नीतीश कुमार को शपथ लिए हुए 105 दिन ही गुज़रे थे कि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया, जिसने राज्य में बन रहे नए समीकरणों को लेकर कई सवाल छोड़ दिए।
प्रशांत का सरकार पर तीखा हमला
जैसे ही बिहार के चुनावी नतीजे आए थे तो एनडीए को पूर्व बहुमत मिली थी, जिसे लेकर महागठबंधन का आरोप वोट चोरी का था तो वहीं प्रशांत किशोर इसे ‘वोट खरीद’ बता रहे थे। दरअसल, बिहार चुनाव के दौरान सरकार द्वारा महिलाओं के खातों में 10 हजार का कैश ट्रांजेक्शन कराया गया था।
बिहार सरकार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत यह राशि प्रदान की गई थी। राज्य की महिलाओं को अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रथम किस्त के रूप में ₹10,000 की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में भेज रही थी। यह योजना स्वयं सहायता समूहों (जीविका) के माध्यम से की गई।
प्रशांत किशोर की आपत्ति
इस मामले में सबसे तीखा हमला जन स्वराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने किया था। उन्होंने नीतीश पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नीतीश ने चुनाव के समय यह योजना चला कर राज्य की महिलाओं के वोट खरीदने का काम किया।
अब कहां हैं प्रशांत
बता दें बिहार में बड़ा सियासी घटनाक्रम घटा है। ऐसे में प्रशांत किशोर कहां हैं यह चर्चा का विषय बना हुआ है। बिहार के इस सियासी घटनाक्रम में उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बता दें, राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने करीब तीन महीने पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भविष्य को लेकर एक बड़ा दावा किया था, जो अब हकीकत में बदलता दिख रहा है।
प्रशांत किशोर ने 2025 में दिए एक बयान में साफ कहा था कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा था कि एनडीए जीतने के बावजूद नीतीश कुमार को सीएम की कुर्सी नहीं मिलेगी और कोई और नेता (संभवतः बीजेपी से) मुख्यमंत्री बनेगा। किशोर ने इस भविष्यवाणी को इतना गंभीरता से लिया था कि उन्होंने कहा, “इसे लिखित में ले लीजिए, अगर मैं गलत साबित हुआ तो अपनी राजनीतिक मुहिम छोड़ दूंगा।”
बता दें, अब नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने पर उन्होंने कोई बयान नहीं दिया है। वे कुछ दिन पहले शिवहर में जन स्वराज की हो रही बैठक में हिस्सा लिया था जहां बिहार नवनिर्माण का कार्यक्रम चला रहे हैं।
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