स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर लगातार चर्चा होती ही रहती है जब जब बीजेपी उनके विचारों के बारे में बात करती है तब तब विपक्ष हमलावर हो जाता है नई संसद के समारोह के दिन भी कई नेताओं ने सिर्फ इसलिए विरोेध किया क्योंकी वीर सावरकर की जयंती के दिन ही संसद भवन का उद्दघाटन किया गया। इस बात से पूरा विपक्ष खफा नजर आया। आज सावरकर की जयंती है तो आज उनके बार में बात करना तो बनता है तो चलिए आपको बताते है कि सावरकर आखिर कौन थे और उन्होंने भारत के क्या क्या किया था।
28 मई, 1883 को हुआ था जन्म
उनका जन्म 28 मई, 1883 को नासिक के भागपुर गांव में हुआ था। और उनकी मृत्यु 26 फरवरी, 1966 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुई थी। उनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर है। वह एक स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, वकील, समाज सुधारक और हिंदुत्व के दर्शन के सूत्रधार थे। उनके पिता का नाम दामोदरपंत सावरकर और माता का नाम राधाबाई था। उन्होंने कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। वे अपने बड़े भाई गणेश बाबराव से काफी प्रभावित थे
वीर सावरकर एक ब्राह्मण हिंदू परिवार से थे
वीर सावरकर एक ब्राह्मण हिंदू परिवार से थे। उनके भाई-बहन गणेश, मैनाबाई और नारायण थे। वह अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते थे और इसलिए उनकी सरनेम वीर रखा गया जो एक साहसी व्यक्ति है। वोअपने बड़े भाई गणेश से प्रभावित थे जिन्होंने उनके किशोर जीवन में एक प्रभावशाली भूमिका निभाई थी। वीर सावरकर भी एक क्रांतिकारी युवक बने। युवावस्था में उन्होंने ‘मित्र मेला’ नाम से एक युवा समूह का आयोजन किया। वह लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल जैसे कट्टरपंथी राजनीतिक नेताओं से प्रेरित थे और समूह को क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल करते थे। उन्होंने पुणे के ‘फर्ग्यूसन कॉलेज’ में दाखिला लिया और अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की।
‘1857 के विद्रोह’ में भूमिका निभाई थी
वीर सावरकर ने ‘1857 के विद्रोह’ की तर्ज पर स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए गुरिल्ला युद्ध की कल्पना की। उन्होंने “द हिस्ट्री ऑफ़ द वॉर ऑफ़ इंडियन इंडिपेंडेंस” नामक पुस्तक लिखी, जिसने बहुत सारे भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया। हालाँकि इस पुस्तक पर अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन इसने कई देशों में लोकप्रियता हासिल की।
हिंदुत्व: हू इज ए हिंदू नामक पुस्तिका लिखी
एक्टिव होने के कारण वो जेल मे भी रहे अपने जेल समय के दौरान, उन्होंने हिंदुत्व: हू इज ए हिंदू?’ नामक एक वैचारिक पुस्तिका लिखी।और इसे सावरकर के समर्थकों ने प्रकाशित किया था। पैम्फलेट में, उन्होंने हिंदू को ‘भारतवर्ष’ (भारत) के एक देशभक्त और गर्वित निवासी के रूप में वर्णित किया और इस तरह कई हिंदुओं को प्रभावित किया। उन्होंने कई धर्मों को जैन धर्म, बौद्ध धर्म, सिख धर्म और हिंदू धर्म के समान बताया। कई आंदोलन उनके समय में किए गए थे जिसकी आज भी चर्चा होती है। आज उनकी जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी उन्हें श्रद्धांजलि दी
विपक्ष का विरोध झेलने वाले वीर सावरकर कौन थे जिनकी आज भी चर्चा होती है
Summary :
स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को लेकर लगातार चर्चा होती ही रहती है जब जब बीजेपी उनके विचारों के बारे में बात करती है तब तब विपक्ष हमलावर हो जाता है नई संसद के समारोह के दिन भी कई नेताओं ने सिर्फ इसलिए विरोेध किया क्योंकी वीर सावरकर की जयंती के दिन ही संसद भवन का उद्दघाटन किया गया। इस बात से पूरा विपक्ष खफा नजर आया।


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