माकपा की महिला शाखा एआईडीडब्ल्यूए ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली छात्रा की गिरफ्तारी को लेकर बृहस्पतिवार को योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि मामले की जांच कर रही एसआईटी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के कहने पर काम कर रही है।
विधि की छात्रा को जबरन वसूली के आरोप में बुधवार को गिरफ्तार किया गया था और उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके कुछ घंटे बाद उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
महिला अधिकार समूह ने कहा, ‘‘ ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमन्स एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) चिन्मयानंद मामले में पीड़िता की जबरन गिरफ्तारी और उसके उत्पीड़न की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि उनके खिलाफ दर्ज कथित जबरन वसूली का मामला तुरंत वापस लिया जाए।’’
समूह ने कहा, ‘‘संगठन योगी आदित्यनाथ सरकार के दबाव में एसआईटी और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा निभाई गई भूमिका की भी निंदा करता है।’’
उसने कहा कि चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार का मामला 27 अगस्त को दर्ज किया गया और 14 दिन बाद आरोपी की गिरफ्तारी हुई और यह भी जनाक्रोश की वजह से हुई।
समूह ने कहा, ‘‘ चिन्मयानंद को जिन धाराओं में गिरफ्तार किया गया है उन्हें भी हल्का किया गया है। पीड़िता ने धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया था। इसके बावजूद उसकी चिकित्सीय जांच नहीं कराई गयी।’’
उसने कहा, ‘‘एआईडीडब्ल्यूए मांग करता है कि पीड़िता को परेशान करना तत्काल बंद किया जाए और आरोपी के खिलाफ धारा 376 के तहत बलात्कार का आरोप लगाया जाए। एआईडीडब्ल्यूए यह भी मांग करता है कि पीड़िता और उसके परिवार को पूरी सुरक्षा दी जाए।’’
चिन्मयानंद फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (सी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत बलात्कार से कम सज़ा होती है।


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