Ganga Expressway पर टोल शुरू होते ही घटी वाहनों की आवाजाही! कई इंटरचेंज पर पसरा सन्नाटा

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Ganga Expressway Toll Tax: मेरठ से प्रयागराज तक बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 मई की रात 12 बजे से टोल वसूली शुरू हो गई है। इस दौरान जिले से गुजरने वाले 92 किलोमीटर हिस्से पर टोल लागू होने के बाद वाहनों की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। पहले जहां बिना टोल के बड़ी संख्या में लोग एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे थे, वहीं अब कई टोल प्लाजा पर आधे से भी कम वाहन पहुंच रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार चालकों से 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर और भारी वाहनों से 8.20 रुपये…

Ganga Expressway Toll Tax: मेरठ से प्रयागराज तक बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 मई की रात 12 बजे से टोल वसूली शुरू हो गई है। इस दौरान जिले से गुजरने वाले 92 किलोमीटर हिस्से पर टोल लागू होने के बाद वाहनों की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। पहले जहां बिना टोल के बड़ी संख्या में लोग एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे थे, वहीं अब कई टोल प्लाजा पर आधे से भी कम वाहन पहुंच रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार चालकों से 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर और भारी वाहनों से 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से शुल्क लिया जा रहा है। टोल लागू होने के बाद सबसे ज्यादा असर स्थानीय लोगों की आवाजाही पर पड़ा है। जो लोग पहले छोटे सफर के लिए भी एक्सप्रेसवे का उपयोग कर रहे थे, अब वे सामान्य सड़कों का सहारा ले रहे हैं।

Ganga Expressway Toll Tax: जिले में बने हैं तीन इंटरचेंज

Ganga Expressway Toll Tax(source social media )
Ganga Expressway Toll Tax(source social media )

गंगा एक्सप्रेसवे का जिले में 92 किलोमीटर लंबा हिस्सा पड़ता है। इस हिस्से में वनकोटा, घटपुरी और डहरपुर नाम से तीन इंटरचेंज बनाए गए हैं। इन सभी स्थानों पर टोल बूथ भी तैयार किए गए हैं। इसके अलावा संभल जिले की सीमा के पास गांव चंदोई में भी एक टोल प्लाजा बनाया गया है। 29 अप्रैल से एक्सप्रेसवे का संचालन शुरू हुआ था। शुरुआती 15 दिनों तक लोगों को टोल शुल्क से राहत दी गई थी। इस कारण लोग बड़ी संख्या में एक्सप्रेसवे देखने और सफर करने पहुंच रहे थे। लेकिन अब शुल्क लगने के बाद वाहनों की संख्या तेजी से घट गई है।

Ganga Expressway Traffic Drop: वनकोटा इंटरचेंज पर कम हुए वाहन

Ganga Expressway Toll Tax(source social media )
Ganga Expressway Toll Tax(source social media )

वनकोटा इंटरचेंज पर शुक्रवार दोपहर काफी सन्नाटा दिखाई दिया। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि पहले प्रतिदिन लगभग 30 से 40 वाहन यहां से गुजरते थे। टोल शुरू होने के बाद यह संख्या घटकर लगभग 15 से 20 रह गई है। कर्मचारियों के मुताबिक रात 12 बजे से दोपहर तक मुश्किल से 10 वाहन ही निकले थे। पहले आसपास के गांव और कस्बों के लोग एक्सप्रेसवे देखने या थोड़ी दूरी तय करने यहां पहुंच रहे थे, लेकिन अब टोल लगने के बाद उनकी संख्या लगभग खत्म हो गई है।

Badaun Ganga Expressway Toll Charges: डहरपुर इंटरचेंज पर भी असर

दातागंज क्षेत्र में बने डहरपुर इंटरचेंज पर भी वाहनों की संख्या में गिरावट साफ नजर आई। दोपहर के समय यहां बहुत कम वाहन गुजरते दिखाई दिए। कर्मचारियों ने बताया कि पहले यहां प्रतिदिन 50 से 60 वाहन आते-जाते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 30 तक पहुंच गई है। यहां तैनात कर्मचारियों का कहना है कि अब केवल वही लोग एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें लंबी दूरी तय करनी होती है। स्थानीय लोग टोल बचाने के लिए दूसरे रास्तों का उपयोग कर रहे हैं।

Toll rates Ganga Expressway Cars: घटपुरी इंटरचेंज पर अब भी सबसे ज्यादा ट्रैफिक

तीनों इंटरचेंज में सबसे ज्यादा वाहन घटपुरी इंटरचेंज से गुजर रहे हैं। यह इंटरचेंज बरेली-मथुरा हाईवे के पास होने के कारण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि यहां भी वाहनों की संख्या में कमी आई है। पहले यहां रोजाना 2400 से 2800 वाहन गुजर रहे थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 1500 रह गई है। फिर भी बाकी इंटरचेंज की तुलना में यहां ट्रैफिक अधिक है। टोल कर्मियों के अनुसार बरेली और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले लोग लखनऊ, कानपुर, रायबरेली और प्रयागराज जैसे शहरों तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते का उपयोग कर रहे हैं। नौकरीपेशा लोग और अधिकारी भी समय बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Impact of Toll on Expressways India: स्थानीय लोगों ने बनाई दूरी

टोल लगने के बाद सबसे ज्यादा बदलाव स्थानीय स्तर पर देखने को मिला है। पहले लोग छोटी दूरी तय करने के लिए भी एक्सप्रेसवे का उपयोग कर रहे थे, लेकिन अब वे सामान्य सड़कों से सफर करना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा जो लोग केवल एक्सप्रेसवे देखने या घूमने के उद्देश्य से यहां पहुंच रहे थे, उनकी संख्या भी लगभग खत्म हो गई है। शाम के समय भी ट्रैफिक पहले की तुलना में काफी कम दिखाई दिया। टोल कर्मचारियों का कहना है कि अब एक्सप्रेसवे पर मुख्य रूप से वही वाहन चल रहे हैं जिन्हें लंबी दूरी तय करनी होती है।

मालवाहक वाहन और दूसरे जिलों या शहरों में जाने वाले लोग ही इस मार्ग को चुन रहे हैं। स्थानीय वाहन चालकों के लिए टोल खर्च अतिरिक्त बोझ बन रहा है, इसलिए वे पुराने रास्तों का उपयोग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में ट्रैफिक की स्थिति और साफ हो सकेगी कि लोग टोल के साथ इस एक्सप्रेसवे को कितना अपनाते हैं।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।