गाजियाबाद: फर्जी दस्तावेज के जरिए जेल से छुड़ाते थे अपराधी, 7 सदस्यों का गिरोह गिरफ्तार

Summary :

600-700 अपराधियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमानत दिलाई

क्राइम ब्रांच और कविनगर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अनोज यादव, इसरार, बबलू, लोकेन्द्र, राहुल शर्मा, सुनील कुमार और विकास राजपूत उर्फ सम्राट शामिल हैं। यह गैंग खतौनी के कागजात निकालकर उनके आधार पर फर्जी आधार कार्ड तैयार करता था और फिर कोर्ट में जमानत दिलवाता था।

गाजियाबाद पुलिस ने गुरुवार को एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करते हुए एक ऐसे संगठित गिरोह को गिरफ्तार किया है, जो सालों से अदालत में फर्जी दस्तावेज पेश कर जेल में बंद अपराधियों को जमानत दिलवाने का काम कर रहा था। क्राइम ब्रांच और कविनगर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की जांच में यह सामने आया कि यह गिरोह अब तक करीब 600 से 700 अपराधियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमानत दिला चुका है। गिरोह के सदस्य पहले किसी असली जमीन के रिकॉर्ड (खतौनी) को निकालते थे और फिर उसी नाम और पते के आधार पर नकली आधार कार्ड बनाते थे। इसके बाद सीएससी सेवा केंद्र की नकली मुहर लगाकर दस्तावेजों को वैध साबित करते और अदालत में फर्जी जमानती बनकर पेश होते थे।

7 सदस्यों का गिरोह गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अनोज यादव, इसरार, बबलू, लोकेन्द्र, राहुल शर्मा, सुनील कुमार और विकास राजपूत उर्फ सम्राट शामिल हैं। पूछताछ में पता चला कि गिरोह के सदस्य 500 से 700 रुपए में फर्जी जमानती उपलब्ध कराते थे। गिरोह का सरगना विकास उर्फ सम्राट एलएलबी का छात्र है और उसी ने फर्जी दस्तावेज बनाना सीखा और अपने साथियों को सिखाया। विकास आधार कार्ड और खतौनियों की फर्जी कॉपियां तैयार करता था, जबकि अन्य सदस्य गाजियाबाद कचहरी परिसर में रहकर इस नेटवर्क को संचालित करते थे। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 21 नकली आधार कार्ड, 18 फर्जी खतौनी, लैपटॉप, स्टाम्प, बेल बॉन्ड और अन्य दस्तावेज़ी सामग्री बरामद की है।

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एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने कहा कि स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और कविनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग कोर्ट से जमानत पाने वाले अभियुक्तों के लिए फर्जी जमानतदार पेश करते थे। यह गैंग खतौनी के कागजात निकालकर उनके आधार पर फर्जी आधार कार्ड तैयार करता था और फिर कोर्ट में जमानत दिलवाता था। यह गिरोह पिछले 3-4 सालों से सक्रिय था और लगातार अदालत में फर्जी जमानती पेश कर रहा था।

उन्होंने आगे कहा कि गिरफ्तार सातों अभियुक्तों के खिलाफ पहले से ही कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

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