वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर को लेकर अब बड़ा फैसला आया है।बता दें हिंदू पक्ष को अब परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति मिल गई है। इस दौरान गुरुवार सुबह लोग पूजा करने के लिए तहखाने में पहुंचे हैं। वाराणसी की जिला अदालत से बुधवार को हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली। जब कोर्ट ने परिसर में मौजूद तहखाने में हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने का आदेश दिया। हिंदुओं को ज्ञानवापी के व्यास जी के तहखाने में पूजा-पाठ करने का अधिकार मिला है।
- ज्ञानवापी परिसर में पूजा-अर्चना शुरू
- 30 साल बाद की जा रही है भगवान की आराधना
- हिंदुओं को ज्ञानवापी के व्यास जी के तहखाने में पूजा-पाठ करने का अधिकार मिला
पूजा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया
आपको बता दें अदालत ने वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को हिंदू पक्ष और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा नामित एक पुजारी के जरिए की जाने वाली पूजा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। 17 जनवरी को वाराणसी जिला अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट को रिसीवर नियुक्त करते हुए उन्हें तहखाने को सुरक्षित रखने और इसमें कोई बदलाव न करने का निर्देश दिया।
हम कोर्ट के आदेश से बेहद खुश और भावुक- श्रद्धालु
ज्ञानवापी मामले में कोर्ट के जरिए हिंदू पक्ष को ‘व्यास का तहखाना’ में पूजा करने की अनुमति देने पर वाराणसी के डीएम एस राजलिंगम ने मीडिया से बात की। उनसे वजूखाने के समक्ष विराजमान नंदी महाराज के सामने लगी बैरीकेडिंग को हटाकर रास्ता खोलने को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा, ‘न्यायालय के आदेश का पालन किया गया है.’ वर्तमान में ज्ञानवापी परिसर के आसपास सुरक्षा को भी कड़ा कर दिया गया है।
#WATCH उत्तर प्रदेश: ज्ञानवापी मामले में कोर्ट द्वारा हिंदू पक्ष को ‘व्यास का तहखाना’ में पूजा करने की अनुमति देने पर वाराणसी के DM एस राजलिंगम ने कहा, “न्यायालय के आदेश का पालन किया गया है..” https://t.co/EVF5upcV7Z pic.twitter.com/7k2dqBFoB5
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 1, 2024
ओवैसी ने अदालत के फैसले पर जताया दुख
कोर्ट के इस फैसले से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने वाराणसी कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि बुधवार को जज साहब के रिटायरमेंट का आखिरी दिन था। 17 जनवरी को रिसीवर बैठाया गया. पूरा केस पहले से ही डिसाइड किया गया था। उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह से प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का उल्लंघन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की तरफ से जब तक इस एक्ट पर चुप्पी नहीं तोड़ी जाती है, तब तक इस तरह की चीजें होती रहेंगी।


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