पारदर्शिता और रिकॉर्ड राजस्व का नया मॉडल बना यूपी का खनन विभाग

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सचिव एवं निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग माला श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में देश का एक प्रमुख भाग है जो मुख्यतः इंडो-गैंजेटिक प्लेन में अवस्थित है। इसके दक्षिण भाग में बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्य क्षेत्र में पठारी एवं चट्टानी संरचनायें पायी जाती है, जिस कारण यहां मुख्यतः स्वस्थानीय किस्म की चट्टानों से खण्डा, गिट्टी, बोल्डर आदि का खनन व उत्पादन होता रहा है।

Lucknow News

Lucknow News : उत्तर प्रदेश में आज खनिज क्षेत्र नए आयाम स्थापित कर रहा है। पूर्व की सरकारों में खनन विभाग को लचर व्यवस्था और अवैध कारोबार के लिए जाना जाता था, आज वह पारदर्शिता और रिकॉर्ड राजस्व का नया मॉडल बन चुका है। इस बड़े बदलाव के पीछे भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के निदेशक की कड़ी मेहनत और विजनरी सोच है, जिसने विभाग की पूरी तस्वीर को ही बदल कर रख दिया है।

सचिव एवं निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग माला श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में देश का एक प्रमुख भाग है जो मुख्यतः इंडो-गैंजेटिक प्लेन में अवस्थित है। इसके दक्षिण भाग में बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्य क्षेत्र में पठारी एवं चट्टानी संरचनायें पायी जाती है, जिस कारण यहां मुख्यतः स्वस्थानीय किस्म की चट्टानों से खण्डा, गिट्टी, बोल्डर आदि का खनन व उत्पादन होता रहा है।

वर्ष 2022 से विभिन्न अन्वेषण एजेंसिओं यथा भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्तरी क्षेत्र लखनऊ, एमईसीएल, नागपुर आदि के प्रयासों से फॉस्फोराईट, लौह अयस्क, चूना पत्थर खनिजों की खोज की गयी जिसके फलस्वरूप वर्ष 2022 से 2026 तक लगभग 4 वर्षाे में ही फॉस्फोराईट, लौह अयस्क व लाइमस्टोन के खनन पट्टों को ई-निविदा सह ई-नीलामी की प्रक्रिया अपनाते हुए निजी निवेशको से बिड प्राप्त करते हुए खनन पट्टों के लिए आशय पत्र निर्गत किए गए हैं।

इनमें से 02 फॉस्फोराईट खनिज के ब्लॉक ऐसे है जिन्हें कम्पोजिट लाइसेंस के लिए ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से आवंटित किया गया था और आवंटी कम्पनियों द्वारा अन्वेषण कार्य पूर्ण करते हुए नियमानुसार खनन पट्टे के लिए आवेदन प्रस्तुत किया और अब उन्हें खनन पट्टे हेतु आशय पत्र भी नियमानुसार निर्गत कर दिया गया है। पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र व वन अनापत्तियां राज्य सरकार व भारत सरकार के स्तर से प्राप्त हो जाने के उपरान्त इन खनिजों का उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य में प्रारम्भ होगा। इससे राजस्व स्रोतों की बढ़ोत्तरी होगी, निवेश के साथ उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि इन खनिजों का उपयोग उर्वरक उद्योग, स्टील उद्योग, सीमेन्ट उद्योग आदि में किया जाता है।

उत्तर प्रदेश राज्य में मुख्य खनिज यथा लौह अयस्क, ग्लूकोनाईट, दुर्लभ मृदा तत्व, स्वर्ण धातु के ब्लॉकों के सम्बन्ध में ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से कम्पोजिट लाइसेंस के लिए आशय पत्र निर्गत है। वहीं प्रदेश में मुख्य खनिजों के अन्वेषण की परियोजनाओं को गति प्रदान करने, खनिजों के नये भण्डार खोजे जाने की सम्भावनाओं व तकनीकी विचार विमर्श के लिए सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म की अध्यक्षता मे गठित राज्य भूवैज्ञानिक कार्यकारिणी परिषद की बैठक खनन निदेशालय में सम्पन्न हुयी, बैठक में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा संचालित अन्वेषण की परियोजनाओं की वर्ष 2025-26 की प्रगति आख्या एवं सत्र 2026-27 के लिए प्रस्तावित अन्वेषण परियोजनाओं की कार्ययोजना प्रस्तुत की गयी।

बैठक में की गयी चर्चा के अनुसार प्रदेश के जनपद ललितपुर, झांसी व सोनभद्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण उत्तरी क्षेत्र द्वारा वर्ष 2026-27 में 15 परियोजनाएं, जनपद झांसी, महोबा व ललितपुर में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, उ0प्र0 की 04 परियोजनाएं, जनपद झांसी में मिनरल एक्सप्लोरेशन एण्ड कंसल्टेंसी लिमिटेड, नागपुर की 02 परियोजनाएं एवं जनपद सोनभद्र में परमाणु ऊर्जा विभाग की 03 परियोजनाए संचालित की जा रही है। इन परियोजनाओं में अन्वेषण कार्य पूर्ण होने के उपरान्त प्रदेश में और अधिक मुख्य खनिजों के ब्लॉक खोजे जा सकेगें जिनका उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ऑक्शन किये जाने पर खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना सम्भव हो सकेगी।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।