Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के मंत्री और शूलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन करते हुए दावा किया कि इससे “भूमि पर कब्जे पर रोक लगेगी” और “पारदर्शिता आएगी।”
वक्फ संशोधन विधेयक का किया समर्थन
राज्य वक्फ बोर्ड से जुड़े मामलों को देखने वाले राजभर ने कहा, “वक्फ बोर्ड का कहना है कि यह जमीन हमारी है और लोग मानते हैं कि भूमि पर कब्जे को रोकने, पारदर्शिता लाने और महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए सरकार ने यह विधेयक पेश किया है।” राजभर ने आगे कहा, “यह विधेयक किसी धर्म को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं लाया गया है, जैसा कि विपक्ष झूठा आरोप लगा रहा है।”
वक्फ बोर्ड से जुड़े 10 से 20 मामले मिलते हैं
राजभर ने दावा किया कि हर दिन उन्हें वक्फ बोर्ड से जुड़े 10 से 20 मामले मिलते हैं, जिसमें लोग दावा करते हैं कि बोर्ड ने उनकी जमीन हड़पी है। “मैं यूपी में कल्याण मंत्री हूं और मुझे रोजाना वक्फ बोर्ड से जुड़े 10 से 20 मामले मिलते हैं, जिसमें लोग दावा करते हैं कि उन्होंने हमारी जमीन हड़प ली है या बेच दी है, इसे रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए संशोधन विधेयक पेश किया गया है।” वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार करने के लिए 21 लोकसभा सांसदों और 10 राज्यसभा सांसदों सहित 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया है।
कोर्ट की टिप्पणी का भी “स्वागत” किया
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश किया और विपक्षी दलों द्वारा इसके प्रावधान पर आपत्ति जताए जाने के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा। यूपी के मंत्री राजभर ने एससी/एसटी समुदायों के उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी “स्वागत” किया। राजभर ने कहा, “मैं पिछले 22 सालों से यह कह रहा हूं कि जो लोग आईएएस, एसपी डीआईजी, राज्यपाल या पीएम बन गए हैं, उन्हें आरक्षण की क्या जरूरत है? बाबा साहब ने संघर्ष कर रहे लोगों के लिए आरक्षण की लड़ाई लड़ी है।”
राजभर ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए ताकि गरीब, पिछड़े और संघर्ष कर रहे अन्य लोग इसका लाभ उठा सकें।” इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान में एससी और एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है और एनडीए सरकार उस संविधान का पालन करने के लिए बाध्य है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि राज्यों के पास अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को उप-वर्गीकृत करने का अधिकार है। शीर्ष अदालत ने यह भी देखा था कि राज्य एससी और एसटी से भी क्रीमी लेयर की पहचान करने के लिए एक नीति विकसित कर सकते हैं ताकि उन्हें सकारात्मक कार्रवाई के लाभ से बाहर रखा जा सके।
(Input From ANI)


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