जयपुर का ‘Pink Elephant’ विवाद, फोटोशूट के बाद हथिनी की मौत पर सोशल मीडिया में मचा बवाल

Pink Elephant Controversy in Jaipur

Pink Elephant Controversy in Jaipur : जयपुर में ‘पिंक एलिफेंट’ फोटोशूट का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। रूस की एक फोटोग्राफर द्वारा किए गए इस अनोखे फोटोशूट और उसके कुछ समय बाद हथिनी की मौत की खबर सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस पूरे मामले को लेकर बहस छिड़ गई है और कई लोग इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं।

दरअसल, इस फोटोशूट में एक हथिनी को गुलाबी रंग से रंगा गया था। इसके साथ ही फोटोशूट में शामिल मॉडल ने भी अपने शरीर पर गुलाबी रंग लगाया और फिर हथिनी के ऊपर बैठकर तस्वीरें खिंचवाईं। जैसे ही ये तस्वीरें इंटरनेट पर सामने आईं, लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से आने लगीं और मामला विवाद का रूप लेता गया।

Pink Elephant Controversy in Jaipur: हथिनी ‘चंचल’ की मौत के बाद बढ़ा विवाद

Pink Elephant Controversy in Jaipur
Pink Elephant Controversy in Jaipur (Source: Social Media)

बताया जा रहा है कि इस फोटोशूट में शामिल हथिनी का नाम चंचल था और उसकी उम्र करीब 65 साल थी। पिछले महीने उसकी मौत हो गई थी। जैसे ही यह खबर सामने आई, कई लोगों ने फोटोशूट और हथिनी की मौत के बीच संबंध जोड़ते हुए सवाल उठाने शुरू कर दिए। लोगों ने अंदेशा जताया कि चूंकि हथिनी को पिंक रंग से रंगा गया इसी वजह से उसकी मौत हुई।

हालांकि, जयपुर हाथी एसोसिएशन ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि हथिनी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। वहीं हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने भी कहा कि हाथी को जिस रंग से रंगा गया था वह गुलाल जैसा प्राकृतिक रंग था, जिसे थोड़ी देर बाद साफ कर दिया गया था।

इस पूरे विवाद के बाद पर्यावरण और पशु अधिकार से जुड़े कई कार्यकर्ताओं ने इस घटना की आलोचना की है। उनका कहना है कि किसी भी जानवर को इस तरह फोटोशूट के लिए रंगना या इस्तेमाल करना गलत है और इसे पशु क्रूरता के रूप में देखा जाना चाहिए।

कई लोगों ने इस मामले में जांच और कार्रवाई की मांग भी की है।

Pink Elephant Controversy in Jaipur
Pink Elephant Controversy in Jaipur

बता दें इसे लेकर सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई हैं, फोटोशूट की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई नजर आईं। कुछ लोगों ने तस्वीरों की कलात्मकता और खूबसूरती की तारीफ की, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने हाथी के साथ किए गए व्यवहार पर चिंता जताई।

एक यूजर ने लिखा कि तस्वीरों को आकर्षक बनाने के लिए किसी जानवर को तकलीफ देना सही नहीं है और इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक का उपयोग किया जा सकता था। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि भले ही रंग ऑर्गेनिक हो, लेकिन पूरे जानवर को रंगना ठीक नहीं है क्योंकि हाथियों की त्वचा बेहद सेंसिटिव होती है।

फोटोग्राफर ने बताया फोटोशूट का आइडिया

इस फोटोशूट की फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेव ने बताया कि वह अपने प्रोजेक्ट के लिए भारत आई थीं और उन्होंने जयपुर में करीब छह हफ्ते बिताए। उनके अनुसार, शहर के रंगों और यहां की संस्कृति से प्रेरित होकर उनके मन में गुलाबी हाथी के साथ फोटोशूट का विचार आया।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में हाथी एक खास प्रतीक की तरह देखा जाता है और यहां की सड़कों, सजावट और इंटीरियर आर्ट में हाथियों की झलक मिलती है। इसलिए वह अपने प्रोजेक्ट में इसे शामिल करना चाहती थीं। उसका मानना था कि वह जयपुर के कल्चर को इस तरह प्रोमोट कर रही थी।

फोटोग्राफर के मुताबिक इस फोटोशूट की तैयारी आसान नहीं थी। उन्होंने कई हाथी फार्म का दौरा किया और ऐसे लोगों से संपर्क किया जो इस प्रोजेक्ट में सहयोग करने के लिए तैयार हों।

आखिरकार उन्हें एक ऐसा फार्म मिला जहां के मैनेजर ने उनकी योजना को समझा और सहयोग करने के लिए तैयार हो गए। फोटोग्राफर ने भरोसा दिलाने के लिए कई बार वहां जाकर बातचीत की।

मॉडल ढूंढना भी नहीं था आसान

फोटोग्राफर के अनुसार भारत जैसे ट्रेडिशनल देश में किसी मॉडल को इस तरह के कॉन्सेप्ट के लिए तैयार करना आसान नहीं था। दरअसल इस शूट में शरीर पर कलर करना था वहीं आधे कपड़े पहनने थे। उन्होंने कई मॉडलों से संपर्क किया, लेकिन ज्यादातर ने परिवार या सामाजिक कारणों से इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया।

आखिरकार उनकी मुलाकात यशस्वी नाम की एक मॉडल से हुई, जिसने इस फोटोशूट के लिए सहमति दी। इसके बाद फरवरी में यह फोटोशूट पूरा किया गया।

Pink Elephant Controversy in Jaipur: फोटोग्राफर ने रंग को सेफ बताया

विवाद उठने के बाद फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेव ने साफ किया है कि इस शूट में इस्तेमाल किया गया रंग पूरी तरह ऑर्गेनिक और स्थानीय था, जो त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले रंगों जैसा ही था। उनके अनुसार यह रंग जानवर के लिए सुरक्षित था।

हालांकि इस सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर बहस जारी है और कई लोग वन्यजीवों के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियमों की मांग कर रहे हैं।

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