अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अफगानिस्तान में 18 साल से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के प्रयास के तहत तालिबान के साथ चल रही वार्ता हमेशा के लिए खत्म हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस के रिपोर्टर्स को बताया, “जहां तक मेरा सवाल है, वह (वार्ता) हमेशा के लिए खत्म हो गई है।”
तालिबान द्वारा एक हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद ट्रंप ने अमेरिका में इसी सप्ताहांत पर तालिबान के प्रतिनिधिमंडल के साथ होने वाली गोपनीय वार्ता रद्द कर दी थी। हमले में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई थी। लग रहा था कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता अंतिम चरण में है और तालिबान ने कहा कि वार्ता रद्द करने से अमेरिका को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपनी प्रमुख विदेश नीति के तहत अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस लाने का वादा किया था, लेकिन जब उनसे अमेरिका के 14,000 सैनिकों के अभी भी वहां मौजूद होने के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा, “हम वहां से वापस आना चाहेंगे लेकिन सही समय पर बाहर आएंगे।”
वार्ता रद्द करने से पहले ट्रंप कैंप डेविड में तालिबान और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी की मेजबानी करने वाले थे। ट्रंप ने हमले को बड़ी गलती बताते हुए कहा, “उन्हें लगा कि वार्ता में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए उन्हें लोगों को मारना होगा।”
उन्होंने कहा,”हमारी एक बैठक प्रस्तावित थी। यह मेरा विचार था और उसे रद्द करने का विचार भी मेरा था। मैंने इस बारे में किसी और से चर्चा तक नहीं की।” हमले की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने कैंप डेविड में होने वाली वार्ता रद्द कर दी क्योंकि उन्होंने कुछ ऐसा किया जो उन्हें निश्चित तौर नहीं करना चाहिए था।”
हमले में एक अमेरिकी सैनिक समेत 12 लोग मारे गए थे। ’11 सितंबर’ हमलों की बरसी से ठीक पहले तालिबान की मेजबानी की योजना को लेकर ट्रंप की आलोचना हुई थी। लेकिन ट्रंप ने यह कहते हुए इसका बचाव किया था कि “वार्ता करना अच्छी बात है ना कि बुरी बात।”


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