अमरुल्लाह सालेह ने UN से लगाई गुहार, बोले- पंजशीर पर ध्यान नहीं दिया गया तो………..

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पंजशीर घाटी पर कब्ज़ा करने के लिए तालिबान की नॉर्दन एलायंस के साथ हिंसक लड़ाई जारी है। खुद को अफगानिस्तान का कार्यकारी राष्ट्रपति घोषित कर चुके अमरुल्लाह सालेह इस समय तालिबान से लोहा ले रहे हैं।

पंजशीर घाटी पर कब्ज़ा करने के लिए तालिबान की नॉर्दन एलायंस के साथ हिंसक लड़ाई जारी है। खुद को अफगानिस्तान का कार्यकारी राष्ट्रपति घोषित कर चुके अमरुल्लाह सालेह इस समय तालिबान से लोहा ले रहे हैं। इस बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति सालेह ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख पंजशीर के लिए वैश्विक नेताओं से मदद की गुहार लगाई है।
संयुक्त राष्ट्र को लिखे एक पत्र में, सालेह ने कहा, काबुल और अन्य बड़े शहरों में तालिबान के कब्जे के बाद पंजशीर पहुंचे स्थानीय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और 10,000 आईडीपी सहित लगभग 2,50,000 लोग इन घाटियों के अंदर फंस गए हैं और तालिबान से पीड़ित हैं। यदि इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरी तरह मानवीय तबाही, जिसमें भुखमरी, सामूहिक हत्या और नरसंहार देखने को मिलेगा।

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उन्होंने अपने पत्र में कहा, तालिबानियों ने पंजशीर तक मानवीय पहुंच को रोक दिया है। यात्रियों से उसका नस्ल पूछते हैं। पंजशीर के सैन्य उम्र के पुरुषों को खदान में काम करवाया जाता है। उसके फोन, बिजली बंद कर देते हैं और दवा की भी अनुमति नहीं देते हैं। लोग कम मात्रा में ही नकदी ले जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 23 वर्षों में आपातकालीन अस्पताल की शुरुआत के बाद से हमने कभी भी तालिबान को आने से नहीं रोका। तालिबानी अब युद्ध अपराध कर रहे हैं और IHL के लिए उनका कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा हम संयुक्त राष्ट्र और विश्व के नेताओं से तालिबानों के इस स्पष्ट आपराधिक और आतंकवादी व्यवहार पर ध्यान देने का आह्वान करते हैं।
अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी अभी तालिबान के हाथों से बाहर है। हालांकि तालिबान ने इसपर कब्जे की बात कही थी, लेकिन अमरुल्लाह सालेह ने तालिबान के इस दावे को ख़ारिज कर दिया था। उन्होंने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम एक मुश्किल स्थिति में हैं। हम पर तालिबान का हमला हुआ है। लेकिन हमारी सेना आत्मसमर्पण नहीं करेगी।

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