BRICS History: 4 देशों से शुरू होकर 11 मुल्कों का पावरफुल ग्रुप बनने तक का पूरा सफर

Summary :

राजनीति और अर्थव्यवस्था के मंच पर आज ब्रिक्स एक ताकतवर नाम बन चुका है। कभी सिर्फ चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक आर्थिक विचार के रूप में शुरू हुआ यह समूह आज 11 प्रमुख देशों का एक मजबूत संगठन बन गया है।

BRICS summit History : ग्लोबल पॉलिटिक्स में दुनिया के अलग अलग देश साझा रणनीति के तहत अपने अपने संगठन बनाते हैं। ऐसे संगठन आमतौर पर ट्रेंड से लेकर डिफेन्स के चलते बनते रहे हैं। कई जगह भोगोलिक परिस्थितियां निर्णायक भूमिका निभाती है।

ऐसे ही राजनीति और अर्थव्यवस्था के मंच पर आज ब्रिक्स एक ताकतवर नाम बन चुका है। कभी सिर्फ चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक आर्थिक विचार के रूप में शुरू हुआ यह समूह आज 11 प्रमुख देशों का एक मजबूत संगठन बन गया है। इसमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। बता दें, इस साल ब्रिक्स का सम्मलेन भारत में हो रहा है।

आज ब्रिक्स दुनिया की कुल आबादी के करीब आधे हिस्से और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। लेकिन इस वैश्विक मंच की शुरुआत कैसे हुई और इसके गठन के पीछे का मुख्य उद्देश्य क्या था, इसे समझना बेहद दिलचस्प है।

1990 के दशक में पड़ी थी विचार की नींव

सन 95 के बाद एक मल्टीपोलर दुनिया का विचार सबसे पहले रूस के पूर्व विदेश मंत्री येवगेनी प्रिमकोव ने रखा था। उन्होंने 1998 में नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस पर जोर दिया था। इसके बाद रूस, इंडिया और चाइना (RIC) तथा इंडिया, ब्राजील और साउथ अफ्रीका (IBSA) जैसे मंच बने, जिन्होंने आगे चलकर ब्रिक्स की नींव मजबूत की।

वहीं, साल 2001 में तब के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने निवेश रणनीतियों के सिलसिले में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए ‘BRIC’ शब्द गढ़ा था। उनका मानना था कि ये चार देश भविष्य में दुनिया की आर्थिक विकास दर को तय करेंगे।

2006 से शुरुआत और 2009 में पहला शिखर सम्मेलन

सितंबर 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर चारों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई और औपचारिक वार्ताओं का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला पूर्ण कूटनीतिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।

इसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रूस के दिमित्री मेदवेदेव, चीन के हु जिंताओ और ब्राजील के लूला डा सिल्वा शामिल हुए। उस वक्त वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार और नए वैश्विक रिजर्व करेंसी पर मंथन हुआ था।

BRIC से BRICS+ तक

मगर आज जिस बड़े संस्था के रूप में यह जाना जा रहा है पहले इतना बड़ा नहीं था। यहां तक कि इसके नाम में S+ बाद में जोड़ा गया। इसे ऐसे समझिए –

दक्षिण अफ्रीका की एंट्री: दिसंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को औपचारिक रूप से शामिल किया गया और इस तरह ‘BRIC’ बदलकर ‘BRICS’ हो गया।

2024 में पहला बड़ा विस्तार: 1 जनवरी 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया। इन देशों को शामिल किए जाने से यह संस्था और भी बड़ा हो गया।

2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया का भी प्रवेश: इंडोनेशिया आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स में शामिल होने वाला दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला देश बना। जिसके बाद यह मौजूदा संस्था जितना बड़ा संस्था बन गया, जिसमें कुल 11 देश इसके पूर्ण सदस्य हैं।

क्या है ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य?

ब्रिक्स का सबसे बड़ा उद्देश्य उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को एक ऐसा साझा मंच देना है जहां वे वैश्विक राजनीति, आर्थिक नीतियों और व्यापारिक मुद्दों पर एक साथ मिलकर अपनी आवाज उठा सकें।

ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार: पश्चिमी देशों और जी-7 (G7) के प्रभुत्व वाले संस्थानों (जैसे आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक) में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ाना भी इसका बड़ा उद्देश्य है। इसके अलावा –

आर्थिक सहयोग और वित्तीय संस्थान: सदस्य देशों ने आपस में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और ब्रिक्स पे जैसी प्रणालियां स्थापित की हैं।

डी-डॉलराइजेशन: इसका आज के समय में जो सबसे किफायती फायदा है वह है डी-डॉलराइजेशन है। इस समय दुनिया भर में अमेरिकी डॉलर हावी है। इस चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था पर इस का बड़ा प्रभाव पड़ता है। इस संस्था का बड़ा उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार को अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में निपटाने को बढ़ावा देना है।

सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा में मदद करना: फूड सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बिना किसी दबाव के एक-दूसरे की मदद करना संस्था का उद्देश्य है।

बता दें, कई आलोचक इसे अलग-अलग विचारधारा वाले देशों का समूह भी मानते हैं, लेकिन इसके बावजूद ब्रिक्स आज ग्लोबल साउथ की बुलंद आवाज बनकर उभरा है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।