तेहरान, 10 सितंबर (आईएएनएस)। हाल के कुछ दिनों में ईरान ने अमेरिका के हमलों का जवाब जॉर्डन को निशाने पर ले दिया है। ईरान ने जॉर्डन के मुवाफ्फक सलती एयरबेस पर कार्रवाई तेज कर दी है। इसकी मुख्य वजह यह है कि तेहरान इस अड्डे को जॉर्डन की सामान्य सैन्य संपत्ति के बजाय अमेरिकी सैन्य अभियानों के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखता है।
अल-अज्रक एयरबेस जॉर्डन की राजधानी अम्मान से करीब 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। बेस का नियंत्रण रॉयल जॉर्डेनियन एयर फोर्स के हाथ में है। यहां अमेरिकी सैनिकों और लड़ाकू विमानों की मौजूदगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉर्डन में करीब 4,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और अल-अज्रक उन ठिकानों में शामिल है, जहां अमेरिकी वायुसेना अपने अभियान संचालित करती है। मार्च से तेहरान कई बार जॉर्डन पर बमबारी करता रहा है।
ईरान का तर्क है कि चूंकि इस बेस का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य अभियानों और सुरक्षित ठिकानों के लिए हो रहा है, इसलिए यह उसके लिए एक वैध सैन्य लक्ष्य है। हालिया हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष में जवाबी कार्रवाई के तौर पर सामने आए हैं। खास तौर पर अमेरिका द्वारा ईरानी तेल टैंकरों पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
फरवरी में ईरान पर इजरायल-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई से पहले अमेरिकी बेड़े के कई विमान यहां पहुंचे थे। वहीं, जीसीसी गुट में शामिल अन्य देशों के बेस से इतर ये ईरान से ज्यादा दूरी पर है। अल जजीरा के अनुसार यूएस कांग्रेस की एक रिपोर्ट ये भी दावा करती है कि इस बेस से सिरिया और इराक के खिलाफ भी मुहिम अमेरिका चलाता रहा है।
9 सितंबर के हमले में जॉर्डन की सेना ने कहा कि ईरान की ओर से दागी गई 20 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 18 को रोक लिया गया, जबकि दो खुले इलाकों में गिरीं। हालांकि, ताजा अमेरिकी रिपोर्ट्स के अनुसार हमले में कुछ अमेरिकी सैन्य विमानों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, जुलाई में उसके मिसाइल हमलों में तीन अमेरिकी सैन्य कर्मियों की मौत हो गई थी।
अल-अज्रक की अहमियत केवल अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी तक सीमित नहीं है। इसका भौगोलिक स्थान अमेरिका को ईरान और क्षेत्र के अन्य युद्धक्षेत्रों से अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी प्रदान करता है। एयरबेस पर एफ-35, एफ-16 और एफ-15 जैसे लड़ाकू विमानों के संचालन और रखरखाव की क्षमता भी इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
यही वजह है कि ईरान के लिए अल-अज्रक पर हमला अमेरिकी सैन्य क्षमता को सीधे चुनौती देने का एक तरीका है, जबकि जॉर्डन के लिए यह बेहद संवेदनशील स्थिति है। अमान अमेरिका का करीबी सुरक्षा सहयोगी है, लेकिन वह खुद को ईरान-अमेरिका संघर्ष में सीधे पक्ष के रूप में नहीं देखता। इसके बावजूद अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के कारण जॉर्डन अब इस युद्ध की चपेट में आ गया है।
ईरान जॉर्डन पर इसलिए हमला नहीं कर रहा है क्योंकि जॉर्डन उसका मुख्य दुश्मन है। उसका निशाना जॉर्डन की जमीन पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचा है। लेकिन इसका सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की ईरानी रणनीति जॉर्डन को भी संघर्ष में और गहराई से खींच रही है।
–आईएएनएस
केआर/
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