कांगो में इबोला: देश के इतिहास का सबसे घातक प्रकोप, 2,300 से ज्यादा लोगों की मौत

Summary :

किन्शासा, 17 अगस्त (आईएएनएस)। इबोला अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) पर कहर बनकर टूटा है। आंकड़ों के लिहाज से ये देश के इतिहास का सबसे घातक प्रकोप बन गया है। संक्रमण से मरने वालों की संख्या 2,300 का आंकड़ा पार कर गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकोप ने 2018-20 के उस इबोला संकट को भी पीछे छोड़ दिया है, जिसमें 2,299 लोगों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इस बार संक्रमण तेजी से फैल रहा है और देश के कई प्रांत इसकी चपेट में आ चुके हैं। सबसे अधिक…

किन्शासा, 17 अगस्त (आईएएनएस)। इबोला अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) पर कहर बनकर टूटा है। आंकड़ों के लिहाज से ये देश के इतिहास का सबसे घातक प्रकोप बन गया है। संक्रमण से मरने वालों की संख्या 2,300 का आंकड़ा पार कर गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकोप ने 2018-20 के उस इबोला संकट को भी पीछे छोड़ दिया है, जिसमें 2,299 लोगों की मौत हुई थी।

स्वास्थ्य अधिकारियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इस बार संक्रमण तेजी से फैल रहा है और देश के कई प्रांत इसकी चपेट में आ चुके हैं। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में इतुरी प्रांत शामिल है, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।

इबोला एक अत्यंत संक्रामक और गंभीर वायरल बीमारी है। संक्रमित व्यक्ति के रक्त और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से इसका संक्रमण फैल सकता है।

इस प्रकोप को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि बड़ी संख्या में नए संक्रमित लोगों का पहले से निगरानी में रहे मरीजों से कोई स्पष्ट संपर्क सामने नहीं आ रहा है। इसका मतलब है कि संक्रमण की श्रृंखला का पता लगाना स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

कांगो में जारी संघर्ष, लोगों का विस्थापन, कमजोर स्वास्थ्य ढांचा और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। बड़ी संख्या में लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के कारण संक्रमण के नए क्षेत्रों में पहुंचने का खतरा भी बना हुआ है।

मौजूदा प्रकोप में बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का वायरस सामने आया है। इस स्ट्रेन के खिलाफ फिलहाल व्यापक रूप से उपलब्ध और स्वीकृत विशिष्ट उपचार या वैक्सीन की कमी चुनौती बनी हुई है। वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संगठन संभावित टीकों तथा उपचारों पर काम कर रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमित लोगों को जल्द पहचानने, उन्हें अलग रखने और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। लेकिन बीमारी की देर से पहचान और इलाज तक पहुंच में मुश्किलें मृत्यु दर को बढ़ा रही हैं।

कांगो पहले भी कई बार इबोला के प्रकोप का सामना कर चुका है। 2018 से 2020 के बीच आया प्रकोप देश के लिए सबसे गंभीर स्वास्थ्य संकटों में से एक था। अब मौजूदा संकट के उससे भी आगे निकल जाने ने अफ्रीका में संक्रामक बीमारियों से निपटने की तैयारियों को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

–आईएएनएस

केआर/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.