Erdoğan Dictator Allegations: इजरायल और तुर्की के बीच पहले से चल रहा तनाव अब और बढ़ गया है। तुर्की की ओर से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी करने की मांग के बाद इजरायल ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन पर तीखा हमला बोला है। नेतन्याहू के कार्यालय ने एर्दोगन को “यहूदी विरोधी तानाशाह” बताया और कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को नजरअंदाज नहीं करेगा। इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय ने आरोप लगाया कि एर्दोगन अब इजरायल के खिलाफ अपनी नीतियों और गतिविधियों को सीरिया तक बढ़ाना चाहते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बयान में कहा गया कि इजरायल इस तरह की कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा और क्षेत्र में अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा। इजरायल ने एर्दोगन पर हमास का समर्थन करने, राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों पर कार्रवाई करने तथा क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने वाली नीतियां अपनाने का भी आरोप लगाया। हालांकि, ये सभी आरोप इजरायल की ओर से लगाए गए हैं और तुर्की इन्हें खारिज करता रहा है।
नेतन्याहू के खिलाफ रेड नोटिस की मांग
तनाव की बड़ी वजह तुर्की की कानूनी कार्रवाई भी है। तुर्की के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक ने बताया कि अंकारा ने ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला को रोके जाने से जुड़े मामले में नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की मांग की है। तुर्की के अनुसार, नेतन्याहू और इजरायली अधिकारी अफेक मोस्कोविच के खिलाफ 14 जुलाई को गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। इसके बाद तुर्की के न्याय मंत्रालय ने दोनों के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की प्रक्रिया शुरू करने के लिए गृह मंत्रालय से अनुरोध किया।
इस्तांबुल की 11वीं हाई क्रिमिनल कोर्ट में चल रहे इस मामले में कुल 35 आरोपियों के नाम बताए गए हैं। तुर्की ने नेतन्याहू और अन्य इजरायली अधिकारियों पर नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, अपहरण, यातना, लूटपाट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इजरायल इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है।
रेड नोटिस का मतलब क्या है?
इंटरपोल रेड नोटिस को अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट समझना सही नहीं है। यह इंटरपोल के सदस्य देशों की पुलिस से किसी व्यक्ति का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर उसे अस्थायी रूप से हिरासत में लेने का अनुरोध होता है। इसके बाद प्रत्यर्पण या अन्य कानूनी प्रक्रिया संबंधित देश के कानून के तहत होती है।
यह पूरा मामला ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला से जुड़ा है। इस बेड़े में शामिल नावें गाजा के लिए मानवीय सहायता लेकर पहुंचने की कोशिश कर रही थीं। इजरायली सेना ने मई में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इन नावों को रोक दिया था। तुर्की का आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान नावों पर मौजूद लोगों के साथ गलत व्यवहार किया गया। इसी घटना को लेकर अंकारा ने नेतन्याहू और अन्य इजरायली अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
सीरिया को लेकर भी आमने-सामने दोनों देश
इजरायल और तुर्की के बीच विवाद सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है। सीरिया को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। हाल ही में इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में अबू अल-दुहुर एयरबेस पर हवाई हमला किया था। इजरायल का कहना है कि उसे आशंका है कि सीरिया में तुर्की अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा सकता है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायली चेतावनियों के बावजूद दमिश्क तुर्की सैनिकों की तैनाती की तैयारी कर रहा था। तुर्की ने इन दावों को बेबुनियाद बताया और इजरायली हमले की निंदा की। अंकारा ने इसे सीरिया की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
गाजा युद्ध के बाद बिगड़े रिश्ते
गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल और तुर्की के रिश्तों में लगातार गिरावट आई है। एर्दोगन कई बार इजरायल पर गाजा में नरसंहार के आरोप लगा चुके हैं। इजरायल इन आरोपों को खारिज करता है। तुर्की ने हमास के साथ भी अपने संबंध बनाए रखे हैं और इजरायली अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का समर्थन किया है।
दूसरी ओर, इजरायल तुर्की की इन गतिविधियों को अपने खिलाफ राजनीतिक और कानूनी अभियान के तौर पर देखता है। अब नेतन्याहू के खिलाफ रेड नोटिस की मांग और सीरिया में तुर्की की संभावित सैन्य भूमिका को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद और गहरा गया है। आने वाले समय में यह तनाव क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है।
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